Top 10+ Motivational Story in Hindi For Success हिंदी कहानियाँ

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Top Motivational Story in Hindi For Success हिंदी कहानियाँ

Motivational Story in Hindi For Success
Motivational Story in Hindi For Success

| संतोष का धन | Top Motivational Story in Hindi For Success

Top Motivational Story in Hindi For Success हिंदी कहानियाँ; 01

पंडित श्री रामनाथ शहर के बाहर अपनी पत्नी के साथ रहते थे | एक जब वो अपने विद्यार्थिओं को पढ़ाने के लिए जा रहे थे तो उनकी पत्नी ने उनसे सवाल किया ” कि आज घर में खाना कैसे बनेगा क्योंकि घर में केवल मात्र एक मुठी चावल भर ही है ?” पंडित जी ने पत्नी की और एक नजर से देखा फिर बिना किसी जवाब के वो घर से चल दिए |

शाम को वो जब वापिस लौट कर आये तो भोजन के समय थाली में कुछ उबले हुई चावल और पत्तियां देखी | यह देखकर उन्होंने अपनी पत्नी से कहा ” भद्रे ये स्वादिष्ट शाक जो है वो किस चीज़ से बना है ??”  मेने जब सुबह आपके जाते समय आपसे भोजन के विषय में पूछा था तो आपकी दृष्टि इमली के पेड़ की तरफ गयी थी |

मैंने उसी के पतों से यह शाक बनाया है | पंडित जी ने बड़ी निश्चितता के साथ कहा अगर इमली के पत्तो का शाक इतना स्वादिष्ट होता है फिर तो हमे चिंता करने की कोई आवश्यकता ही नहीं है अब तो हमे भोजन की कोई चिंता ही नहीं रही |

जब नगर के राजा को पंडित जी की गरीबी का पता चला तो राजा ने पंडित को नगर में आकर रहने का प्रस्ताव दिया किन्तु पंडित ने मना कर दिया | तो राजा हैरान हो गया और स्वयं जाकर उनकी कुटिया में उनसे मिलकर इसका कारण जानने की इच्छा हुई |

राजा उनकी कुटिया में गया तो राजा ने काफी देर इधर उधर की बाते की लेकिन वो असमंजस में था कि अपनी बात किस तरह से पूछे लेकिन फिर उसने हिम्मत कर पंडित जी से पूछ ही लिया कि आपको किसी चीज़ का कोई अभाव तो नहीं है न ??

पंडित जी हसकर बोले यह तो मेरी पत्नी ही जाने इस पर राजा पत्नी की और आमुख हुए और उनसे वही सवाल किया तो पंडित जी की पत्नी ने जवाब दिया कि अभी मुझे किसी भी तरीके का अभाव नहीं है क्योंकि मेरे पहनने के वस्त्र इतने नहीं फटे कि वो पहने न जा सकते और पानी का मटका भी तनिक नहीं फूटा कि उसमे पानी नहीं आ सके और इसके बाद मेरे हाथों की चूडिया जब तक है मुझे किसी चीज़ का क्या अभाव हो सकता है ?? और फिर सीमित  साधनों में भी संतोष की अनुभूति हो तो जीवन आनंदमय हो जाता है |

| विश्वाश की शक्ति | Motivational Story in Hindi

Top Motivational Story in Hindi For Success हिंदी कहानियाँ : 09
इंग्लैंड के एक पादरी का विश्वाश की अध्यात्मिक शक्ति में अटल भरोसा था | जो कोई भी उनके घर में एक बार आ जाता वो उनके आथित्य और सत्कार के प्रभाव से प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकता था | उनके मन में लोगो के लिए अथाह प्रेमभाव था इसलिए लोग उनका बहुत सम्मान भी करते थे |  एक दिन जेल से भागा हुआ चोर रात में शरण लेने के लिए इधर उधर घूम रहा था |

उसने देखा कि पादरी के घर का दरवाजा खुला हुआ है इसलिए वो उस और चला गया और पादरी के घर में प्रवेश कर गया | पादरी ने उसे देखते ही उसका अभिवादन किया और उस से कहा ” तुम्हारा मेरे इस घर में स्वागत है मेरे भाई लेकिन तुम ये बताओ तुम कौन हो और यंहा क्या करने आये हो इस पर चोर ने सफेद झूट बोलते हुए कहा ” फादर मैं एक मुसाफिर हूँ और रास्ता भटक गया हूँ सो इधर उधर भटक रहा था और आपके घर का दरवाजा खुला हुआ देखा तो इस और चला आया | क्या मुझे सिर छुपाने के लिए जगह मिल सकती है मैं सुबह होते ही यंहा से चला जाऊंगा |”

पादरी ने उस से कहा ” हाँ क्यों नहीं तुम यंहा आराम से रह सकते हो और मुझे लगता है तुम बहुत थक गये हो इसलिए तुम जाकर आराम से हाथ मुहं धो लो मैं तुम्हारे सोने और खाने का प्रबंध करता हूँ |” इस पर चोर पादरी का आभार व्यक्त करते हुए स्नानघर की और बढ़ गया और  इतने में पादरी ने उसके खाने और सोने की व्यवस्था कर दी | पादरी ने उसका बहुत अच्छे से आथित्य सत्कार किया और उसे अच्छा भोजन करवाकर उसके सोने की व्यवस्था कर दी |

रात को सभी के सो जाने के बाद चोर के मन में चोरी की ईच्छा जागृत हुई और उसने पादरी के घर से सोने के दो दीपदान चुराकर वंहा से निकल भागा | रात में पुलिस उसकी तलाश में ही थी सो वो पुलिस के हत्थे चढ़ गया तो पूछताछ में उसने बता दिया कि मैंने ये पादरी के घर से चुराए है इस पर उसे पादरी के सामने लाया गया तो पादरी ने पुलिस वालों से कहा “आप कृपया इन्हें छोड़ दीजिये ये मेरे घर में मेहमान के तौर पर आये थे और मैंने ये दीपदान इन्हें उपहार के तौर पर दिए है |”

इतने में चोर के ज्ञानचक्षु खुल गये और उसे अपनी भूल का अहसास होने लगा | पादरी की उदारता देखते हुए चोर के मन में पश्चाताप होने लगा और उसने माफ़ी मांग कर कभी फिर से चोरी नहीं करने का वचन दिया |

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| अपना अपना नजरिया | Motivational Story in Hindi

Top Motivational Story in Hindi For Success हिंदी कहानियाँ : 08
एक बार एक संत अपने शिष्यों के साथ नदी में स्नान कर रहे थे | तभी एक राहगीर वंहा से गुजरा तो महात्मा को नदी में नहाते देख वो उनसे कुछ पूछने के लिए रुक गया | वो संत से पूछने लगा ” महात्मन एक बात बताईये कि यंहा रहने वाले लोग कैसे है क्योंकि मैं अभी अभी इस जगह पर आया हूँ और नया होने के कारण मुझे इस जगह को कोई विशेष जानकारी नहीं है |”

इस पर महात्मा ने उस व्यक्ति से कहा कि ” भाई में तुम्हारे सवाल का जवाब बाद में दूंगा पहले तुम मुझे ये बताओ कि तुम जिस जगह से आये वो वंहा के लोग कैसे है ?” इस पर उस आदमी ने कहा “उनके बारे में क्या कहूँ महाराज वंहा तो एक से एक कपटी और दुष्ट लोग रहते है इसलिए तो उन्हें छोड़कर यंहा बसेरा करने के लिए आया हूँ |”  महात्मा ने जवाब दिया बंधू ” तुम्हे इस गाँव में भी वेसे ही लोग मिलेंगे कपटी दुष्ट और बुरे |” वह आदमी आगे बढ़ गया |

थोड़ी देर बाद एक और राहगीर उसी मार्ग से गुजरता है और महात्मा से प्रणाम करने के बाद कहता है ” महात्मा जी मैं इस गाँव में नया हूँ और परदेश से आया हूँ और इस ग्राम में बसने की इच्छा रखता हूँ लेकिन मुझे यंहा की कोई खास जानकारी नहीं है इसलिए आप मुझे बता सकते है ये जगह कैसे है और यंहा रहने वाले लोग कैसे है ?”

महात्मा ने इस पर फिर वही प्रश्न किया और उनसे कहा कि ” मैं तुम्हारे सवाल का जवाब तो दूंगा लेकिन बाद में पहले तुम मुझे ये बताओ कि तुम पीछे से जिस देश से भी आये हो वंहा रहने वाले लोग कैसे है ??”

उस व्यक्ति ने महात्मा से कहा ” गुरूजी जन्हा से मैं आया हूँ वंहा भी सभ्य सुलझे हुए और नेकदिल इन्सान रहते है मेरा वंहा से कंही और जाने का कोई मन नहीं था लेकिन व्यापार के सिलसिले में इस और आया हूँ और यंहा की आबोहवा भी मुझे भा गयी है इसलिए मेने आपसे ये सवाल पूछा था |” इस पर महात्मा ने उसे कहा बंधू ” तुम्हे यंहा भी नेकदिल और भले इन्सान मिलेंगे |”  वह राहगीर भी उन्हें प्रणाम करके आगे बढ़ गया |

शिष्य ये सब देख रहे थे तो उन्होंने ने उस राहगीर के जाते ही पूछा गुरूजी ये क्या अपने दोनों राहगीरों को अलग अलग जवाब दिए हमे कुछ भी समझ नहीं आया | इस पर मुस्कुराकर महात्मा बोले वत्स आमतौर पर हम आपने आस पास की चीजों को जैसे देखते है वैसे वो होती नहीं है इसलिए हम अपने अनुसार अपनी दृष्टि (point of view) से चीजों को देखते है और ठीक उसी तरह जैसे हम है |

अगर हम अच्छाई देखना चाहें तो हमे अच्छे लोग मिल जायेंगे और अगर हम बुराई देखना चाहें तो हमे बुरे लोग ही मिलेंगे | सब देखने के नजरिये ( point of view in hindi ) पर निर्भर करता है ।

यही जिन्दगी का सार है |

| बदलाव | Motivational Story in Hindi

Top Motivational Story in Hindi For Success हिंदी कहानियाँ : 07
जिन्दगी में बहुत सारे अवसर ऐसे आते है जब हम बुरे हालात का सामना कर रहे होते है और सोचते है कि क्या किया जा सकता है क्योंकि इतनी जल्दी तो सब कुछ बदलना संभव नहीं है और क्या पता मेरा ये छोटा सा बदलाव कुछ क्रांति लेकर आएगा या नहीं लेकिन मैं आपको बता दूँ हर चीज़ या बदलाव की शुरुआत बहुत ही basic ढंग से होती है |

कई बार तो सफलता हमसे बस थोड़े ही कदम दूर होती है कि हम हार मान लेते है जबकि अपनी क्षमताओं पर भरोसा रख कर किया जाने वाला कोई भी बदलाव छोटा नहीं होता और वो हमारी जिन्दगी में एक नीव का पत्थर भी साबित हो सकता है | चलिए एक कहानी पढ़ते है इसके द्वारा समझने में आसानी होगी कि छोटा बदलाव किस कदर महत्वपूर्ण है |

एक लड़का सुबह सुबह दौड़ने को जाया करता था | आते जाते वो एक बूढी महिला को देखता था | वो बूढी महिला तालाब के किनारे छोटे छोटे कछुवों की पीठ को साफ़ किया करती थी | एक दिन उसने इसके पीछे का कारण जानने की सोची |

वो लड़का महिला के पास गया और उनका अभिवादन कर बोला ” नमस्ते आंटी ! मैं आपको हमेशा इन कछुवों की पीठ को साफ़ करते हुए देखता हूँ आप ऐसा किस वजह से करते हो ?”  महिला ने उस मासूम से लड़के को देखा और इस पर लड़के को जवाब दिया ” मैं हर रविवार यंहा आती हूँ और इन छोटे छोटे कछुवों की पीठ साफ़ करते हुए सुख शांति का अनुभव लेती हूँ |” 

क्योंकि इनकी पीठ पर जो कवच होता है उस पर कचता जमा हो जाने की वजह से इनकी गर्मी पैदा करने की क्षमता कम हो जाती है इसलिए ये कछुवे तैरने में मुश्किल का सामना करते है | कुछ समय बाद तक अगर ऐसा ही रहे तो ये कवच भी कमजोर हो जाते है इसलिए कवच को साफ़ करती हूँ |

यह सुनकर लड़का बड़ा हैरान था | उसने फिर एक जाना पहचाना सा सवाल किया और बोला “बेशक आप बहुत अच्छा काम कर रहे है लेकिन फिर भी आंटी एक बात सोचिये कि इन जैसे कितने कछुवे है जो इनसे भी बुरी हालत में है जबकि आप सभी के लिए ये नहीं कर सकते तो उनका क्या क्योंकि आपके अकेले के बदलने से तो कोई बड़ा बदलाव नहीं आयेगा न |

महिला ने बड़ा ही संक्षिप्त लेकिन असरदार जवाब दिया कि भले ही मेरे इस कर्म से दुनिया में कोई बड़ा बदलाव नहीं आयेगा लेकिन सोचो इस एक कछुवे की जिन्दगी में तो बदल्वाव आयेगा ही न | तो क्यों हम छोटे बदलाव से ही शुरुआत करें |

| कैसे लोगों पर भरोसा करें आप | Motivational Story in Hindi

Top Motivational Story in Hindi For Success हिंदी कहानियाँ: 06
गुरुकुल में शिष्यों की शिक्षा पूर्ण हो चुकी थी और आज उनका आखिरी दिन था | गुरुकुल की परम्परा के अनुसार गुरूजी अपने शिष्यों को आखिरी उपदेश देने की तेयारी कर रहे थे | जब सारे शिष्य गुरुकुल के मुख्य कक्ष में इक्कठे हो गये तो गुरूजी ने अपना उपदेश देना शुरू किया | उनके हाथ में लकड़ी के कुछ खिलोने थे |

उन्होंने शिष्यों को वो खिलोने दिखाते हुए बोले “मेरे हाथ में जो ये खिलोने है आपको इन तीनो में से अंतर खोजना है ” गुरूजी की आज्ञा पाकर शिष्य बड़े ध्यान से खिलौनों को देखने लगे | वो तीनो लकड़ी के बने हुए खिलौने थे बिलकुल एक सामान दिखने वाले गुड्डे थे | जिनमे अंतर खोजना बहुत मुश्किल था  |

तभी एक शिष्य ने एक गुड्डे को परखते हुए कहा “अरे ये देखो इसके कान में छेद है |” यह संकेत काफी था इतने में सारे शिष्यों ने एक एक करके उन तीनो में अंतर खोज लिया |  तो उन सबने गुरूजी से बोला कि गुरूजी इस गुड्डो में बस यही एक अंतर है एक के कानों में छेद है | एक के मुहं में और एक कान में छेद है और एक के केवल एक कान में छेद है |

उनका जवाब सुनकर गुरूजी बोले बिलकुल सही कहा अब गुरूजी ने शिष्यों को धातू का एक पतला तार देते हुए उसे गुड्डो के कान में डालने को कहा | शिष्यों ने वैसा ही किया तो क्या देखते है एक गुड्डे के कान से होते हुए वो तार दूसरे कान से निकल गया | एक और गुड्डे के कान से होकर वो तार मुहं से निकल गया | जबकि एक के कान में तार डालने पर वो कंही से नहीं निकला |

इस पर गुरूजी ने उन्हें समझाया कि देखो इसी तरह तुम्हे जिन्दगी में तीन तरह के लोग मिलेंगे | एक वो जिनसे अगर तुम कुछ कहते हो तो वो एक कान से सुनकर दूसरे कान से निकाल देते है ऐसे लोगो के साथ कोई भी बात तुम शेयर मत करना |

एक वो लोग होंगे जो तुम्हारी बातें सुनकर किसी और के सामने जाकर कहेंगे ऐसे में उनसे कोई भी अहम् बात शेयर मत करना और एक वो होंगे जिनसे तुम कोई भी बात कहोगे जिन पर तुम भरोसा कर सकते हो उसी तीसरे गुड्डे की तरह और उनसे तुम किसी भी बात के विषय में सलाह ले सकते हो | ऐसे लोग तुम्हारी ताकत बनेंगे | बस आपको लोगो की सही परख होना आवश्यक है |

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| सजा बनी सीख | Motivational Story in Hindi

Top Motivational Story in Hindi For Success हिंदी कहानियाँ : 05
यह पुराने समय की सनकी राजा की कहानी है | राजा के  उसके जुल्म करने की भी कोई सीमा नहीं थी | अगर उसे किसी आदमी पर गुस्सा आ जाता तो उसे बड़ी अमानवीय सज़ा दिया कर था जैसे की किसी को रात भर बर्फ के पानी के अंदर खड़े रहने की सजा |

एक दिन उसे अपने महामंत्री अरुणेश पर गुस्सा आ गया तो उसने वही तरीका अपनाया और अपने मंत्री को रात भर ठन्डे पानी में खड़े रहने की सज़ा दे दी | अरुणेश बहुत ही बुद्धिमान व्यक्ति था | वह सोचने लगा कि क्या तरीका हो सकता है कि राजा को सबक मिल सके और खुद वो इस सज़ा से भी बच जाये |

अचानक उसके दिमाग में एक युक्ति आ गयी और जब शाम के वक़्त राजा ने अरुणेश को सज़ा देने के लिए बुलाया तो अरुणेश चेहरे पर मुस्कान लिए राजा के पास पहुंचा तो राजा ने उसे ठन्डे पानी में जाने के लिए इशारा किया लेकिन उसने देखा कि महामंत्री के चेहरे पर बिलकुल भी शिकन या भय नहीं है जबकि वो तो ख़ुशी से झूम रहा है जैसे उसके लिए ये कोई अच्छा अवसर हो |

हैरान राजा ने उस से पूछ ही लिया कि तुम इतना प्रसन्न किस वजह से जबकि मेने तुम्हे ये सज़ा दी है क्या तुम्हे डर नहीं लग रहा इस पर महामंत्री ने राजा से कहा इसमें डरने वाली कौनसी बात है मेरे लिए तो ये एक तरह से बहुत अच्छा ही है.

क्योंकि राज वैध्य ने मुझे बताया है कि जल्दी गुस्सा हो जाने वाले व्यक्ति समय से पहले बुढ़ापा पा लेते है और ठन्डे पानी में खड़े रहना इसका सर्वोत्तम उपाय है  इसलिए मेरे लिए तो ये फायदेमंद ही होगा क्योंकि मैं भी तो बहुत अधिक गुस्सा करता हूँ|

राजा को चिंता हुई उसने सोचा बात तो इसकी भी वाजिब है क्योंकि मैं भी तो बहुत गुस्सा करता हूँ इसलिए उसने महामंत्री को जाने से रोक दिया और कहने लगा तुम नहीं जाओगे मैं आज की रात ये उपचार लूँगा क्योंकि राजा को बुढ़ापे का भय था |

थोडा समय बीता राजा को ठण्ड लगने लगी लेकिन जवानी के लालच में वो खड़ा रहा | लेकिन फिर थोड़ी देर बाद ही उसे ख्याल आया की ठन्डे पानी में खड़े रहकर भला कौनसी जवानी हासिल होती है जबकि व्यक्ति इसमें तो बीमार हो सकता है और अधिक देर तक खड़े रहने के बाद उसकी मौत भी हो सकती है | सहसा उसे अपनी भूल का अहसास हो गया कि मैं भी लोगो को ऐसी सज़ा देता हूँ तो उन्हें भी तो कितनी पीड़ा होती होगी | शायद इसी लिए अरुणेश ने मुझे शिक्षा देने के लिए ये कहा होगा |

राजा को अपनी गलती का अहसास हो गया और उसने महामंत्री को बुलाकर उससे क्षमा मांगी और भविष्य में ऐसे अजब गजब आदेश नहीं देने का वचन भी दिया |

| योग्य राजा का चुनाव | Motivational Story in Hindi

Top Motivational Story in Hindi For Success हिंदी कहानियाँ : 04
चन्दन वन का राजा शेर बहुत वृद्ध हो गया | इसी वजह से उसने शिकार के लिए बाहर निकलना भी बंद कर दिया | वह अब और अधिक वन पर शासन नहीं कर सकता था और इसी वजह से वन में बहुत अशांति पैदा हो गयी |

शेर ने एक दिन सभी जानवरों को बुलाकर कहा कि तुम जाकर सभी जानवरों में से एक को राजा चुन लो जो जंगल की व्यवस्था को देख सके ताकि सब पहले जैसा हो जाये और चूँकि मैं अब वृद्द हो चुका हूँ इसलिए और अधिक राज्य नहीं कर सकता |

इस पर सभी जानवरों ने इकठ्ठा होकर इस पर सहमती करने का विचार किया और वो इसके बाहर आ कर आपस में विचार करने लगे तो समस्या ये हो गयी कि सभी जानवर खुद को राजा बनने के योग्य मान रहे थे तो इस पर सभी के अपने अपने मतभेद भी थे इस पर काफी देर बाद भी जब सहमती नहीं बन पाई तो चंदू खरगोश ने एक सुझाव दिया कि सभी जानवरों को उनकी क्षमता के अनुसार काम दिया जायेगा.

और दस दिन बाद फिर यंही पर एक सभा होगी और जानवरों द्वारा किये जाने वाले काम की समीक्षा की जाएगी जिसने सबसे अधिक काम किया होगा वही राजा बनने के योग्य होगा सभी जानवरों को उनकी जिम्मेदारी दे दी गयी और मोटू हाथी को जिम्मेदारी मिली वो थी बड़े बड़े पत्थरों को गड्ढे में डालना |

दस दिन बड़ी आसानी से बीत गये सभी जानवर इकठा हुए तो देखा कि मोटू हाथी को छोड़कर सभी लोगो ने अपना अपना काम कर दिया है तो वो लोग फिर दुविधा में हो गये ऐसे में पक्षिराज गरुड़ ने मतदान करने की सलाह दी तो सब इसके लिए राजी हो गये | मतदान हुआ तो देखते है कि सबसे अधिक वोट जिसके पक्ष में पड़े है वो है मोटू हाथी सबको बड़ी हैरानी हुए तो एक चिड़िया ने आकर सबकी उलझन दूर की |

चिड़िया ने कहा कि मोटू हाथी ने इसलिए गड्ढे में पत्थर नहीं डाले क्योंकि गड्डे में ऊगे एक छोटे पेड़ पर मेने अंडे दिए हुए थे और मोटू ने अपने राजा बनने की परवाह नहीं करते हुए मेरे बच्चो के जीवन के बारे में अधिक सोचा इसलिए गरुड़ ने मतदान का सुझाव दिया क्योंकि जो अपनी नहीं सोचकर दूसरों के बारे में अधिक सोचता है वही राजा बनने के योग्य है |

वंहा मौजूद सभी जानवरों ने ध्वनिमत से हाँ में हाँ मिलायी और मोटू हाथी वो वंहा का राजा घोषित कर दिया इसके बाद चन्दन वन में फिर कभी अशांति नहीं हुई |

| सच्चा हिरा | Motivational Story in Hindi

Top Motivational Story in Hindi For Success हिंदी कहानियाँ : 03
सायंकाल का समय था | सभी पक्षी अपने अपने घोसले में जा रहे थे | तभी गाव कि चार ओरते कुए पर पानी भरने आई और अपना अपना मटका भरकर बतयाने बैठ गई |

इस पर पहली ओरत बोली अरे ! भगवान मेरे जैसा लड़का सबको दे | उसका कंठ इतना सुरीला हें कि सब उसकी आवाज सुनकर मुग्ध हो जाते हें |

इसपर दूसरी ओरत बोली कि मेरा लड़का इतना बलवान हें कि सब उसे आज के युग का भीम कहते हें |

इस पर तीसरी ओरत कहाँ चुप रहती वह बोली अरे ! मेरा लड़का एक बार जो पढ़ लेता हें वह उसको उसी समय कंठस्थ हो जाता हें |

यह सब बात सुनकर चोथी ओरत कुछ नहीं बोली तो इतने में दूसरी ओरत ने कहाँ “ अरे ! बहन आपका भी तो एक लड़का हें ना आप उसके बारे में कुछ नहीं बोलना चाहती हो” |

इस पर से उसने कहाँ मै क्या कहू वह ना तो बलवान हें और ना ही अच्छा गाता हें |

यह सुनकर चारो स्त्रियों ने मटके उठाए और अपने गाव कि और चल दी |

तभी कानो में कुछ सुरीला सा स्वर सुनाई दिया | पहली स्त्री ने कहाँ “देखा ! मेरा पुत्र आ रहा हें | वह कितना सुरीला गान गा रहा हें |” पर उसने अपनी माँ को नही देखा और उनके सामने से निकल गया |

अब दूर जाने पर एक बलवान लड़का वहाँ से गुजरा उस पर दूसरी ओरत ने कहाँ | “देखो ! मेरा बलिष्ट पुत्र आ रहा हें |” पर उसने भी अपनी माँ को नही देखा और सामने से निकल गया |

तभी दूर जाकर मंत्रो कि ध्वनि उनके कानो में पड़ी तभी तीसरी ओरत ने कहाँ “देखो ! मेरा बुद्धिमान पुत्र आ रहा हें |” पर वह भी श्लोक कहते हुए वहाँ से उन दोनों कि भाति निकल गया |

तभी वहाँ से एक और लड़का निकला वह उस चोथी स्त्री का पूत्र था |

वह अपनी माता के पास आया और माता के सर पर से पानी का घड़ा ले लिया और गाव कि और निकल पढ़ा |

यह देख तीनों स्त्रीयां चकित रह गई | मानो उनको साप सुंघ गया हो | वे तीनों उसको आश्चर्य से देखने लगी तभी वहाँ पर बैठी एक वृद्ध महिला ने कहाँ “देखो इसको कहते हें सच्चा हिरा”

“ सबसे पहला और सबसे बड़ा ज्ञान संस्कार का होता हें जो किसे और से नहीं बल्कि स्वयं हमारे माता-पिता से प्राप्त होता हें | फिर भले ही हमारे माता-पिता शिक्षित हो या ना हो यह ज्ञान उनके अलावा दुनिया का कोई भी व्यक्ति नहीं दे सकता हें.

| उपरवाले के दरबार में कोड़े | Motivational Story in Hindi

Top Motivational Story in Hindi For Success हिंदी कहानियाँ : 03
एक राजा के पास एक नौकर था,यूँ तो राजा के पास बहुत सारे नौकर थे जिनका काम सिर्फ महल की देख-रेख और साफ़ सफाई करना था. तो एक बार राजा का एक नौकर उनके शयन कक्ष की सफाई कर रहा था,सफाई करते करते उसने राजा के पलंग को छूकर देखा तो उसे बहुत ही मुलायम लगा,उसे थोड़ी इच्छा हुयी कि उस बिस्तर पर जरा लेट कर देखा जाए कि कैसा आनंद आता है,उसने कक्ष के चरों और देख कर इत्मीनान कर लिया कि कोई देख तो नहीं रहा.

जब वह आश्वस्त हो गया कि कोई उसे देख नहीं रहा है तो वह थोड़ी देर के लिए बिस्तर पर लेट गया.

वह नौकर काम कर के थका-हारा था,अब विडम्बना देखिये कि बेचारा जैसे ही बिस्तर पर लेटा,उसकी आँख लग गयी,और थोड़ी देर के लिए वह उसी बिस्तर पर सो गया..उसके सोये अभी मुश्किल से पांच मिनट बीते होंगे कि तभी कक्ष के सामने से गुजरते प्रहरी की निगाह उस सोये हुए नौकर पर पड़ी.

नौकर को राजा के बिस्तर पर सोते देख प्रहरी की त्यौरियां चढ़ गयी,उसने तुरंत अन्य प्रहरियों को आवाज लगायी.सोते हुए नौकर को लात मार कर जगाया और हथकड़ी लगाकर रस्सी से जकड लिया गया.

नौकर को पकड़ लेने के पश्चात उसे राजा के दरबार तक खींच के लाया गया.

राजा को सारी वस्तुस्थिति बताई गयी…उस नौकर की हिमाकत को सुनकर राजा की भवें तन गयी,यह घोर अपराध!! एक नौकर को यह भी परवाह न रही कि वह राजा के बिस्तर पर सो गया.

राजा ने फ़ौरन आदेश दिया ‘नौकर को उसकी करनी का फल मिलना ही चाहिए,तुरत इस नौकर को ५० कोड़े भरी सभा में लगाये जाएँ.’

नौकर को बीच सभा में खड़ा किया गया,और कोड़े लगने शुरू हो गए.

लेकिन हर कोड़ा लगने के बाद नौकर हँसने लगता था.जब १०-१२ कोड़े लग चुके थे,तब भी नौकर हँसता ही जा रहा था,राजा को यह देखकर अचरच हुआ.

राजा ने कहा ‘ठहरो!!’

सुनते ही कोड़े लगाने वाले रुक गए,और चुपचाप खड़े हो गए.

राजा ने नौकर से पूछा ‘यह बताओ कि कोड़े लगने पर तो तुम्हे दर्द होना चाहिए,लेकिन फिर भी तुम हंस क्यूँ रहे हो?’

नौकर ने कहा ‘हुजूर,मैं यूँ ही हंस नहीं रहा,दर्द तो मुझे खूब हो रहा है,लेकिन मैं यह सोचकर हँस रहा हूँ कि थोड़ी देर के लिए मैं आपके बिस्तर पर सो गया तो मुझे ५० कोड़े खाने पड़ रहे हैं,हुजूर तो रोज इस बिस्तर पर सोते हैं,तो उन्हें उपरवाले के दरबार में कितने कोड़े लगाये जायेंगे.’

इतना सुनना था कि राजा अनुत्तरित रह गए,उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने तुरत उस नौकर को आजाद करने का हुक्म दे दिया.

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| लालच बुरी बला है | Motivational Story in Hindi

Top Motivational Story in Hindi For Success हिंदी कहानियाँ : 02
एक शहर में एक आदमी रहता था। वह बहुत ही लालची था। उसने सुन रखा था की अगर संतो और साधुओं की सेवा करे तो बहुत ज्यादा धन प्राप्त होता है। यह सोच कर उसने साधू-संतो की सेवा करनी प्रारम्भ कर दी। एक बार उसके घर बड़े ही चमत्कारी संत आये।

उन्होंने उसकी सेवा से प्रसन्न होकर उसे चार दीये दिए और कहा,”इनमे से एक दीया जला लेना और पूरब दिशा की ओर चले जाना जहाँ यह दीया बुझ जाये, वहा की जमीन को खोद लेना, वहा तुम्हे काफी धन मिल जायेगा। अगर फिर तुम्हे धन की आवश्यकता पड़े तो दूसरा दीया जला लेना और पक्षिम दिशा की ओर चले जाना, जहाँ यह दीया बुझ जाये, वहा की जमीन खोद लेना तुम्हे मन चाही माया मिलेगी।

फिर भी संतुष्टि ना हो तो तीसरा दीया जला लेना और दक्षिण दिशा की ओर चले जाना। उसी प्रकार दीया बुझने पर जब तुम वहाँ की जमीन खोदोगे तो तुम्हे बेअन्त धन मिलेगा। तब तुम्हारे पास केवल एक दीया बच जायेगा और एक ही दिशा रह जायेगी। तुमने यह दीया ना ही जलाना है और ना ही इसे उत्तर दिशा की ओर ले जाना है।”

यह कह कर संत चले गए।  लालची आदमी उसी वक्त पहला दीया जला कर पूरब दिशा की ओर चला गया। दूर जंगल में जाकर दीया बुझ गया। उस आदमी ने उस जगह को खोदा तो उसे पैसो से भरी एक गागर मिली। वह बहुत खुश हुआ। उसने सोचा की इस गागर को फिलहाल यही रहने देता हूँ, फिर कभी ले जाऊंगा। पहले मुझे जल्दी ही पक्षिम दिशा वाला धन देख लेना चाहिए।

यह सोच कर उसने दुसरे दिन दूसरा दीया जलाया और पक्षिम दिशा की ओर चल पड़ा। दूर एक उजाड़ स्थान में जाकर दीया बुझ गया। वहा उस आदमी ने जब जमीन खोदी तो उसे सोने की मोहरों से भरा एक घड़ा मिला। उसने घड़े को भी यही सोचकर वही रहने दिया की पहले दक्षिण दिशा में जाकर देख लेना चाहिए। जल्दी से जल्दी ज्यादा से ज्यादा धन प्राप्त करने के लिए वह बेचैन हो गया।

अगले दिन वह दक्षिण दिशा की ओर चल पड़ा। दीया एक मैदान में जाकर बुझ गया। उसने वहा की जमीन खोदी तो उसे हीरे-मोतियों से भरी दो पेटिया मिली। वह आदमी अब बहुत खुश था।

तब वह सोचने लगा अगर इन तीनो दिशाओ में इतना धन पड़ा है तो चौथी दिशा में इनसे भी ज्यादा धन होगा। फिर उसके मन में ख्याल आया की संत ने उसे चौथी दिशा की ओर जाने के लिए मन किया है। दुसरे ही पल उसके मन ने कहा,” हो सकता है उत्तर दिशा की दौलत संत अपने लिए रखना चाहते हो। मुझे जल्दी से जल्दी उस पर भी कब्ज़ा कर लेना चाहिए।” ज्यादा से ज्यादा धन प्राप्त करने की लालच ने उसे संतो के वचनों को दुबारा सोचने ही नहीं दिया।

अगले दिन उसने चौथा दीया जलाया और जल्दी-जल्दी उत्तर दिशा की ओर चल पड़ा। दूर आगे एक महल के पास जाकर दीया बुझ गया। महल का दरवाज़ा बंद था। उसने दरवाज़े को धकेला तो दरवाज़ा खुल गया। वह बहुत खुश हुआ। उसने मन ही मन में सोचा की यह महल उसके लिए ही है। वह अब तीनो दिशाओ की दौलत को भी यही ले आकर रखेगा और ऐश करेगा।

वह आदमी महल के एक-एक कमरे में गया। कोई कमरा हीरे-मोतियों से भरा हुआ था। किसी कमरे में सोने के किमती से किमती आभूषण भरे पड़े थे। इसी प्रकार अन्य कमरे भी बेअन्त धन से भरे हुए थे। वह आदमी चकाचौंध होता जाता और अपने भाग्य को शाबासी देता। वह जरा और आगे बढ़ा तो उसे एक कमरे में चक्की चलने की आवाज़ सुनाई दी।

वह उस कमरे में दाखिल हुआ तो उसने देखा की एक बूढ़ा आदमी चक्की चला रहा है। लालची आदमी ने बूढ़े से कहा की तू यहाँ कैसे पंहुचा। बूढ़े ने कहा,”ऐसा कर यह जरा चक्की चला, मैं सांस लेकर तुझे बताता हूँ।”

लालची आदमी ने चक्की चलानी प्रारम्भ कर दी। बूढ़ा चक्की से हट जाने  पर ऊँची-ऊँची हँसने लगा। लालची आदमी उसकी ओर हैरानी से देखने लगा। वह चक्की बंद ही करने लगा था की बूढ़े ने खबरदार करते हुए कहा, “ना ना चक्की चलानी बंद ना कर।” फिर बूढ़े ने कहा,”यह महल अब तेरा है। परन्तु यह उतनी देर तक खड़ा रहेगा जितनी देर तक तू चक्की चलाता रहेगा।

अगर चक्की चक्की चलनी बंद हो गयी तो महल गिर जायेगा और तू भी इसके निचे दब कर मर जायेगा।” कुछ समय रुक कर बूढ़ा फिर कहने लगा,”मैंने भी तेरी ही तरह लालच करके संतो की बात नहीं मानी थी और मेरी सारी जवानी इस चक्की को चलाते हुए बीत गयी।”

वह लालची आदमी बूढ़े की बात सुन कर रोने लग पड़ा। फिर कहने लगा,”अब मेरा  इस चक्की से छुटकारा कैसे होगा?”

बूढ़े ने कहा,”जब तक मेरे और तेरे जैसा कोई आदमी लालच में अंधा होकर यहाँ  नही आयेगा। तब तक तू इस चक्की से छुटकारा नहीं पा सकेगा।” तब उस लालची आदमी ने बूढ़े से आखरी सवाल पूछा,”तू अब बाहर जाकर क्या करेगा?”

बूढ़े ने कहा,”मैं सब लोगो से ऊँची-ऊँची कहूँगा, लालच बुरी बला है।”.

| दुष्टता का फल | Motivational Story in Hindi

Top Motivational Story in Hindi For Success हिंदी कहानियाँ : 01
कंचनपुर के एक धनी व्यापारी के घर में रसोई में एक कबूतर ने घोंसला बना रखा था । किसी दिन एक लालची कौवा जो है वो उधर से आ निकला । वंहा मछली को देखकर उसके मुह में पानी आ गया ।  तब उसके मन में विचार आया कि मुझे इस रसोघर में घुसना चाहिए लेकिन कैसे घुसू ये सोचकर वो परेशान था तभी उसकी नजर वो कबूतरों के घोंसले पर पड़ी ।

उसने सोचा कि मैं अगर कबूतर से दोस्ती कर लूँ तो शायद मेरी बात बन जाएँ । कबूतर जब दाना चुगने के लिए बाहर निकलता है तो कौवा उसके साथ साथ निकलता है । थोड़ी देर बाद कबूतर ने पीछे मुड़कर देखता तो देखा कि कौवा उसके पीछे है इस पर कबूतर ने कौवे से कहा भाई तुम मेरे पीछे क्यों हो इस पर कौवे ने कबूतर से कहा कि तुम मुझे अच्छे लगते हो इसलिए मैं तुमसे दोस्ती करना चाहता हूँ.

इस पर कौवे से कबूतर ने कहा कि हम कैसे दोस्त बन सकते है हमारा और तुम्हारा भोजन भी तो अलग अलग है मैं बीज खाता हूँ और तुम कीड़े । इस पर कौवे ने चापलूसी दिखाते हुए कहा “कौनसी बड़ी बात है मेरे पास घर नहीं है इसलिए हम साथ साथ तो रह ही सकते है है न और साथ ही भोजन खोजने आया करेंगे तुम अपना और मैं अपना ।”

इस पर घर के मालिक ने देखा कि कबूतर के साथ एक कौवा भी है तो उसने सोचा कि चलो कबूतर का मित्र होगा इसलिए उसने उस बारे में अधिक नहीं सोचा । अगले दिन कबूतर खाना खोजने के लिए साथ चलने को कहता है तो कौवे ने पेट दर्द का बहाना बना कर मना कर दिया । इस पर कबूतर अकेला ही चला गया क्योंकि कौवे ने घर के मालिक को यह कहते हुए सुना था नौकर को कि आज कुछ मेहमान आ रहे है इसलिए तुम मछली बना लेना ।

उधर कौवा नौकर के रसोई से बाहर निकलने का इन्तजार ही कर रहा था कि उसके जाते ही कौवे ने थाली और झपटा और मछली उठाकर आराम से खाने लगा । नौकर जब वापिस आया तो कौवे को मछली खाते देख गुस्से से भर गया और उसने कौवे को पकड़ कर गर्दन मरोड़ कर मार डाला ।

जब शाम में कबूतर वापिस आया तो उसने कौवे की हालत देखी तो सारी बात समझ गया । इसलिए कहा गया है दुष्ट प्रकृति के प्राणी को उसके किये की सज़ा अवश्य मिलती है ।

WACH VIDEO | Motivational Story in Hindi

Conclusion:

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