Top 5 Baccho Ki Kahaniya Hindi Mai बच्चों की कहानियाँ

नमस्ते दोस्तों आज हम Top 5 Baccho Ki Kahaniya Hindi Mai के बारे में बात करने वाले हैं, तो दोस्तों हम आपके लिए बच्चों की कहानियाँ पोस्ट लाए हैं, चले   Baccho Ki Kahaniya Hindi Mai जानते हैं आपको बहुत सारी नॉलेज देगी, हमारी HindiYouth.com वेबसाइट का एक ही मकसद है कि हिंदुस्तान के युवाओं को सही जानकारी मिल सके.

Top 5 Baccho Ki Kahaniya Hindi Mai बच्चों की कहानियाँ

Top 5 Baccho Ki Kahaniya Hindi Mai बच्चों की कहानियाँ
Top 5 Baccho Ki Kahaniya Hindi Mai बच्चों की कहानियाँ

कैसा हो सच्चा मित्र ( Top 5 Baccho Ki Kahaniya Hindi Mai )

बच्चों की कहानियाँ Baccho Ki Kahaniya Hindi Mai : झील किनारे एक जंगल में हिरण, कछुआ और कठफोड़वा मित्र भाव से रहते थे। एक दिन एक शिकारी ने उनके पैरों के निशान देखकर उनके रास्ते में पड़ने वाले पेड़ पर एक फंदा लटका दिया और अपनी झोपड़ी में चला गया। थोड़ी ही देर में हिरण मस्ती में झूमता हुआ उधर से निकला और फंदे में फंस गया।

वह जोर से चिल्लाया – बचाओ। उसकी पुकार सुनकर कठफोड़वा के साथ कछुआ वहां आ गया। कठफोड़वा कछुए से बोला- मित्र तुम्हारे दांत मजबूत हैं। तुम इस फंदे को काटो। मैं शिकारी का रास्ता रोकता हूं।

जैसे ही कछुआ फंदा काटने में लग गया। उधर कठफोड़वा शिकारी की झोपड़ी की तरफ उड़ चला। उसने योजना बनाई कि जैसे ही शिकारी झोपड़ी से बाहर निकलेगा, वह उसे चोंच मारकर लहूलुहान कर देगा।

उधर शिकारी ने भी जैसे ही हिरण की चीख सुनी तो समझ गया कि वह फंदे में फंस चुका है। वह तुरंत झोपड़ी से बाहर निकला और पेड़ की ओर लपका। लेकिन कठफोड़वे ने उसके सिर पर चोंच मारनी शुरू कर दी। शिकारी अपनी जान बचाकर फिर झोपड़ी में भागा और पिछवाड़े से निकलकर पेड़ की ओर बढ़ा।

लेकिन कठफोड़वा शिकारी से पहले ही पेड़ के पास पहुंच गया था। उसने देखा की कछुआ अपना काम कर चुका है, उसने हिरण और कछुए से कहा – मित्रों जल्दी से भागो। शिकारी आने ही वाला होगा।

यह सुनकर हिरण वहां से भाग निकला। लेकिन कछुआ शिकारी के हाथ लग गया। शिकारी ने कछुए को थैले में डाल लिया और बोला इसकी वजह से हिरण मेरे हाथ से निकल गया। आज इसको ही मारकर खाऊंगा।

हिरण ने सोचा उसका मित्र पकड़ा गया है। उसने मेरी जान बचाई थी, अब मेरा भी फर्ज बनता है कि मैं उसकी मदद करूं। यह सोचकर वह शिकारी के रास्ते में आ गया।

शिकारी ने हिरण को देखा तो थैले को वहीं फेंककर हिरण के पीछे भागा। हिरण अपनी पुरानी खोह की ओर भाग छूटा। शिकारी उसके पीछे-पीछे था। भागते-भागते हिरण अपनी खोह में घुस गया। उसने सोचा एक बार शिकारी इस खोह में घुस गया तो उसका बाहर निकलना मुश्किल हो जाएगा।

थोड़ी ही देर में शिकारी खोह में पहुंचा। उसने सोचा अब हिरण भागकर कहां जाएगा। वह भी खोह के अंदर घुस गया। खोह के अंदर भूल-भुलैया जैसे रास्ते थे। शिकारी उन रास्तों में भटक गया।

हिरण दूसरे रास्ते से निकलकर थैले के पास जा पहुंचा और कछुए को आजाद कर दिया। उसके बाद वे तीनों मित्र वहां से सही-सलामत निकल गए।

किसका ज्ञान काम आया ( Top 4 Baccho Ki Kahaniya Hindi Mai )

Baccho Ki Kahaniya Hindi Mai : एक बार एक लंबा चौड़ा व्यक्ति सामान लेकर एक स्टेशन पर उतरा। वह स्टेशन से बाहर आया और अपने लिए टैक्सी तलाशने लगा। सामने ही एक टैक्सी वाला खड़ा था।

उस व्यक्ति ने टैक्सी वाले से कहा मनोरम बिल्डिंग जाना है, कितना पैसा लोगे?

टैक्सी वाला बोला – 100 रु. लगेंगे।

उस व्यक्ति ने बुद्धिमानी दिखाते हुए कहा- इतने पास के 100 रु., यह क्या लूट मचा रखी है। मैं पैदल ही अपना सामान लेकर मनोरम बिल्डिंग तक पहुंच जाऊंगा।

आदमी जिद्दी था और इसी कारण उसने अपना सामान उठाया और पैदल ही चलने लगा। आधे घंटे तक चलने के बाद उसे फिर से वही टैक्सी वाला दिखाई दिया।

उसने टैक्सी वाले को रोका और कहा कि अब तो आधी दूरी तय हो गई है अब कितना पैसा लोगे? टैक्सी वाला बोला अब 200 रु. लगेंगे। आदमी हैरान रह गया और उसने पूछा कि पहले 100 लग रहे थे और अब 200 क्यों लगेंगे?

टैक्सी वाले ने फट से जवाब दिया महाशय आप मनोरम बिल्डिंग से ठीक उल्टी दिशा में 3 किलोमीटर दूर आ गए हैं। मनोरम बिल्डिंग स्टेशन के दूसरी ओर है। उस व्यक्ति ने इसके बाद कुछ नहीं कहा और चुपचाप गाड़ी में बैठ गया।

बात सच भी है सिर्फ ज्ञान होने से कुछ नहीं होता बल्कि ज्ञान के साथ विवेक भी जरूरी है। इसी तरह सिर्फ शक्ति होना पर्याप्त नहीं है बल्कि शक्ति का समझ के साथ इस्तेमाल जरूरी है।

किस से कहूँ? ( Top 3 Baccho Ki Kahaniya Hindi Mai )

Baccho Ki Kahaniya Hindi Mai : मीना,चिंटू और सुमी स्कूल जा रहे हैं। मीना ये जानने को उत्सुक है कि अगले हफ्ते होने वाली प्रतियोगिता का विषय क्या होगा? और उस प्रतियोगिता के लिए किस-किस विद्यार्थी का चयन हुआ होगा?

मीना,चिंटू और सुमी स्कूल पहुंचे। सूचना पट पर कागज लगा हुआ था। मीना,सुमी और चिंटू भाग के सूचना पट के पास पहुंचे। अगले हफ्ते होने वाली प्रतियोगिता के लिए जिन बच्चों का चयन हुआ है उनके नाम हैं- दीपू,रोशनी,कृष्णा,मीना,चिंटू और सुमी। प्रतियोगिता का विषय है विज्ञान।

चूँकि चिंटू को विज्ञान से डर लगता है इसलिए वो उदास हो जाता है।

सुमी-चिंटू…क्या तुम्हें सचमुच विज्ञान से डर लगता है?

चिंटू- सुमी, डर तो लगेगा ही क्योंकि मास्टर जी जिस तरह विज्ञान पढ़ाते हैं…मुझे तो कुछ समझ नही आता।

चिंटू प्रतियोगिता को लेकर बहुत उदास था और जब स्कूल की छुट्टी के बाद वो अपने घर पहुंचा….

उसकी माँ ने उसे खाना खाने को कहा। चिंटू बोला, ‘मुझे भूख नहीं है माँ।…. प्रतियोगिता के लिए मुझे चुन लिया गया है माँ लेकिन ….मैं

प्रतियोगिता में भाग नहीं लूँगा क्योंकि प्रतियोगिता का विषय विज्ञान है।…..मैं विज्ञान में बहुत ही कमजोर हूँ। 

मास्टर जी जी क्या पढ़ाते हैं मुझे कुछ समझ नही आता।

माँ ने पूँछा, ‘क्या तुमने इस बारे में मास्टरजी से बात की?

चिंटू- नहीं माँ….अगर मैं उनसे इस बारे में बात करूं और वो गुस्सा हो गए तो।

चिंटू की माँ उससे सुमी के घर चलने को कहती हैं… “सुमी के पिताजी स्कूल प्रबन्धन समिति के सदस्य है। मैं उनसे कहूंगी कि वो प्रिंसिपल साहिबा से इस बारे में बात करें।”

और फिर थोड़ी देर बाद चिंटू की माँ और चिंटू गए सुमी के घर। सुमी के माँ, अगले हफ्ते होने वाले अपने भांजे की शादी में, जाने को तैयार खडी हैं। चूँकि उनकी बस का समय हो जाने के कारण सुमी के पिताजी उनकी समस्या के बारे में, कल स्कूल प्रबन्ध समिति की मीटिंग में आके, बात करने को कह देते हैं।

चिंटू की माँ(लीला)-…सुमी, खूब मजे करना शादी में।

सुमी के पिताजी- लीला भाभी…सुमी कहीं नहीं जा रही ….वो इसलिए अगर सुमी शादी में गयी तो फिर स्कूल कौन जाएगा?

और अगले दिन स्कूल प्रबंधन समिति की मीटिंग में…..

सुमी के पिताजी-….लीला भाभी का कहना है कि विज्ञान के मास्टर जी ठीक से नही पढ़ाते।

लीला- जी प्रिंसिपल साहिबा….इसी वजह से मेरा बीटा चिंटू अगले हफ्ते होने वाली प्रतियोगिता में भाग नहीं लेना चाहता।

प्रिसिपल साहिबा-….अगर मास्टर जी ठीक ढंग से नहीं पढ़ाते तो अब तक कई बच्चों की शिकायत हमारे पास आ गयी होती।

सुमी के पिताजी सुझाव देते है, ‘सुमी और मीना भी चिंटू की क्लास में पढ़ते हैं क्यों न उन्हें यहाँ बुलाके ये बात पूँछी जाए?”

चौकीदार मीना औए सुमी को लेकर प्रिंसिपल साहिबा के दफ्तर में पहुँचा।

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Top 5 Baccho Ki Kahaniya Hindi Mai बच्चों की कहानियाँ

प्रिसिपल साहिबा- मीना…सुमी, क्या तुम्हें विज्ञान के मास्टर जी से कोई शिकायत है? मेरा मतलब क्या वो ठीक से नही पढ़ाते?

मीना-…ऐसी कोई बात नही है।

चिंटू- मुझे विज्ञान के पाठ समझने में बहुत मुश्किल होती है।

प्रिसिपल साहिबा- मीना जरा वो उपस्थिति का रजिस्टर लाना तो।

चिंटू पिछले महीने में सिर्फ ९ दिन ही स्कूल में आया था।

प्रिंसीपल साहिबा लीला से कहती हैं, ‘अब आपको पता चला कि चिंटू को विज्ञान पढ़ने में मुश्किल क्यों आ रही है?’

सुमी के पिताजी- किसी भी विषय के पाठ जंजीर के कड़ियों की तरह होते है एक दूसरे से जुड़े हुए,एक भी कड़ी छुट गयी तो समझो जंजीर टूट गयी।

चिंटू को बात समझ आ जाती है और उसकी माँ लीला को भी।

सुमी के पिताजी प्रश्न उठाते हैं, ‘…चिंटू की समस्या कैसे हल की जाए।?’

मीना कहती है, ‘चाचा जी, प्रतियोगिता होने में अभी एक हफ्ता है तब तक सुमी और मैं चिंटू को विज्ञान के वो सभी पाठ पढ़ा देंगे जो छुट्टियाँ लेने के कारण ये नहीं पढ़ पाया था।

बहिन जी- शाबाश! मीना, मैं भी मास्टर जी से कहूंगी कि वो भी क्लास में चिंटू की तरफ विशेष ध्यान दें।

मीना,मिठ्ठू की कविता-

“अपने मन के कागज़ पे इस बात को करलो दर्ज,

रोज स्कूल बच्चों को भेजना हर माँ बाप का फर्ज”

काम की जिम्मेदारी ( Top 2 Baccho Ki Kahaniya Hindi Mai )

Baccho Ki Kahaniya Hindi Mai : मीना आज पतंग उड़ा रही है। पतंग की डोर टूट जाती है…..मीना पतंग पकड़ने के लिए भागी। वो अपनी आँखें जमाये उसके पीछे भाग रही थी। तभी उसकी पतंग जा फंसी रीता के घर के सामने वाले पेड़ की टहनियों में। मीना उछल-उछल कर पतंग की डोर को पकड़ने की कोशिश कर रही थी। जिसे देख के वहां खड़ा श्रवण (रीता का भाई) हँसने लगा।

मीना पेड़ पर चढ़ कर पतंग उतार लाई।

श्रवण- मीना तुमने तो कमाल कर दिया।

मीना- इसमें कमाल कैसा श्रवण? पेड़ पर चढ़ना कोई मुश्किल काम थोड़े ही ना है। वैसे तुम यहाँ खड़े-खड़े क्या कर रहे हो?

श्रवण बताता है कि वह डाकिया चाचा की राह देख रहा है।……अपनी चिठ्ठी का इंतज़ार करता है। दरअसल कई दिन पहले……

तभी श्रवण की माँ उसे घर के काम निपटाने को आवाज़ लगाती है। घर में मेहमान आने वाले हैं और रीता को थोड़ी देर के बाद बेला के साथ मेले में जाना है….। माँ कहती है कि मैं कपडे धो रही हूँ तुम उन्हें तार पर डाल देना।

श्रवण तुम कहो तो कुएं से पानी भरकर ले आऊंगा मैं।

मीना उसे कपडे सुखाने की सलाह देती है। श्रवण कहता है, ‘ ये घर के काम करना, मुझे नहीं अच्छा लगता। बहुत शर्म आती है मुझे ये सब करने में…और वैसे भी कपडे सुखाना, वर्तन मांजना,खाना बनाना, घर साफ करना …ये सब लड़कियों के काम हैं।

मीना, श्रवण को राजू का उदहारण देते हुए समझाती है, ‘ मेरा भाई राजू….जब भी जरूरत होती है वो घर के कामों में मेरा और माँ का हाथ बटाता है।’

तभी श्रवण की माँ पानी भरने को फिर से आवाज़ लगाती हैं। श्रवण भागता हुआ कुएं पर गया और जल्दी से पानी भरकर ले आया।

मीना ने श्रवण को उसकी चिठ्ठी दी जो लेखुराम ने श्रवण को लिखी है। ‘लेखूराम…मशहूर लेखक’। श्रवण मीना को बताता है, ‘दरअसल मैं लेखूराम को अपनी कई कहानियां भेज चुका हूँ और मैं हर चिठ्ठी में उनसे निवेदन करता हूँ कि वो मुझे बताएं कि उन्हें मेरी कहानियां कैसी लगी?….और देखो, आज उनका जबाब भी आ गया।

श्रवण लिफाफा खोल के चिठ्ठी पढ़ता है- “प्रिय श्रवण, मैंने तुम्हारी लिखी सारी कहानियां पढी, वो कहानियां मुझे कैसी लगी ये मैं तुम्हें मिलके बताऊंगा।…श्रवण तुम्हे ये जाँ के खुशी होगी कि मेरी बहन तुम्हारे ही गाँव में रहती है और मैं इस महीने की १६ तारीख को एक दिन के लिए अपनी बहन के पास आ रहा हूँ ..हो सके तो मुझसे मिलना। तुम्हारा शुभचिंतक- लेखुराम”

‘अरे हाँ १६ तारीख तो आज ही है। मैं जल्दी से लेखूराम से मिलने जाता हूँ।’

मीना- श्रवण, पहले चाची जी और रीता को ये खुशखबरी दो।

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Top 5 Baccho Ki Kahaniya Hindi Mai बच्चों की कहानियाँ

श्रवण ने रीता और अपनी माँ को सारी बात बताई।जिसे सुन के वो दोनो बहुत खुश हुईं।

श्रवण की माँ- ये तो बहुत खुशी की बात है, तुम लेखूराम से मिलने जरूर जाओ लेकिन घर के काम में मेरी मदद करके।

श्रवण की माँ उसे समझाती है, ‘काम तो काम होता है बेटा, फिर इसमें अच्छे बुरे की क्या बात है?….तुम्हें जाना है जरूर जाओ लेकिन घर के काम में मेरी मदद…..।

श्रवण- ठीक है, नहीं जाऊँगा मैं लेखूराम से मिलने…..हुंह।

मीना- अरे, तुम गुस्सा क्यों हो रहे हो श्रवण। चाचीजी,आप श्रवण को जाने दीजिये घर के काम में मैं आपकी मदद कर दूंगी।

श्रवण लेखूराम से मिलने उसकी बहन के घर गया। उस समय लेखूराम खाना खा रहा था। खाना खाते-खाते, लेखूराम ने श्रवण से बहुत सी बातें की और फिर….खाना ख़त्म करके उसने अपने वर्तन उठाये और श्रवण से बोला, ‘ मैं ये वर्तन धो के अभी आता हूँ।’

लेखूराम समझाते हुए कहते हैं, ‘अपना काम करने में शर्म कैसी?’…घर के काम करने की जिम्मेदारी जितनी लड़कियों की है उतनी लड़कों की भी है। और वैसे भी ये काम लड़कियों के है वो लड़कों के हैं, मुझे न ये कहना अच्छा लगता है न ही सुनना।’ 

लेखूराम की बात सुनके श्रवण गहरे सोच में पड़ गया। शायद उसे एहसास हो रहा था कि उसे घर के काम करने में रीता और माँ का हाथ बताना चाहिए था।

कर्ज से अच्छे खजूर ( Top 1 Baccho Ki Kahaniya Hindi Mai )

Baccho Ki Kahaniya Hindi Mai : एक स्कूल के छात्रों ने एक बार पिकनिक का प्रोग्राम बनाया। सभी बच्चे इसके लिए अपने घर से कुछ न कुछ खास खाने की चीज बनवाकर लाने वाले थे। स्कूल के स्टूडेंट्‍स में एक गरीब छात्र भी था। उसने घर आकर मां को सारी बात बताई।

मां ने बताया कि घर में बनाने के लिए कोई खास चीज नहीं है। बालक दुखी हो गया।

तभी मां ने कहा कि घर में कुछ खजूर रखे हैं तू उन्हें ले जा। कुछ देर बाद मां को लगा कि पिकनिक पर बाकी सभी बच्चे खाने-पीने की अच्छी चीजें लेकर आएंगे, ऐसे में बेटा खजूर ले जाएगा तो ठीक नहीं लगेगा।

मां ने तुरंत बेटे से कहा कि तुम्हारे पिताजी आने वाले हैं। जैसे ही वे आएंगे, मैं बाजार से अच्‍छी चीज मंगवा लूंगी। बच्चा निराश होकर एक तरफ बैठ गया। थोड़ी देर बाद पिता घर आए। बेटे को उदास बैठा देखकर उन्होंने अपनी पत्नी से पूछा- क्या हुआ? और पत्नी ने उन्हें सारी बात बताई। पति-पत्नी देर तक आपस में विचार कर रहे थे।

आंगन में बैठा बालक उन्हें देखता रहा, उसे दुख था कि उसके कारण उसके माता-पिता परेशानी में हैं। कुछ देर बाद बालक ने देखा कि उसके पिता चप्पल पहनकर बाहर जा रहे हैं।

बालक ने पूछा- ‘पिताजी क्या जान सकता हूं कि आप कहां जा रहे हैं।

पिता बोले- बेटा तेरी उदासी मुझसे देखी नहीं जाती, मैं अपने मित्र से कुछ पैसे उधार लेने जा रहा हूं, जिससे तू भी पिकनिक पर ‍अच्छी चीजें ले जा सकेगा।

बालक ने जवाब दिया- नहीं पिताजी! उधार मांगना अच्‍छी बात नहीं है। मैं पिकनिक पर यह खजूर ही ले जाऊंगा। कर्ज लेकर शान दिखाना बुरी बात है।

पिता ने पुत्र को सीने से लगा लिया। आगे जाकर यही बालक पंजाब के लाला लाजपतराय के नाम से विख्‍यात हुआ।

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