Story Of Akbar Birbal In Hindi अकबर बीरबल के मजेदार किस्से

नमस्ते दोस्तों आज हम Story Of Akbar Birbal In Hindi के बारे में बात करने वाले हैं, तो दोस्तों हम आपके लिए 45 Story Of Akbar Birbal लाए हैं, चले Story Of Akbar Birbal In Hindi जानते हैं जो आपको बहुत ही पसंद आएगी जो बहुत ही मजेदार और रोचक आपको हमने बताई है.

Story Of Akbar Birbal In Hindi अकबर बीरबल के मजेदार किस्से

45 Story Of Akbar Birbal In Hindi अकबर बीरबल के मजेदार किस्से
45 Story Of Akbar Birbal In Hindi अकबर बीरबल के मजेदार किस्से

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बीरबल की योग्यता

Story Of Akbar Birbal In Hindi 1: दरबार में बीरबल से जलने वालों की कमी नहीं थी। बादशाह अकबर का साला तो कई बार बीरबल से मात खाने के बाद भी बाज न आता था। बेगम का भाई होने के कारण अक्सर बेगम की ओर से भी बादशाह को दबाव सहना पड़ता था।

ऐसे ही एक बार साले साहब स्वयं को बुद्धिमान बताते हुए दीवान पद की मांग करने लगे। बीरबल अभी दरबार में नहीं आया था। अतः बादशाह अकबर ने साले साहब से कहा—मुझे आज सुबह महल के पीछे से कुत्ते के पिल्ले की आवाजें सुनाई दे रही थीं, शायद कुतिया ने बच्चे दिए हैं। देखकर आओ, फिर बताओ कि यह बात सही है या नहीं ?

साले साहब चले गए, कुछ देर बाद लौटकर बोले—हुजूर आपने सही फरमाया, कुतिया ही ने बच्चे दिए हैं।

अच्छा कितने बच्चे हैं ? बादशाह ने पूछा।

हुजूर वह तो मैंने गिने नहीं।

गिनकर आओ।

साले साहब गए और लौटकर बोले—हुजूर पाँच बच्चे हैं ?

कितने नर हैं…कितने मादा ? बादशाह ने फिर पूछा।

वह तो नहीं देखा।

जाओ देखकर आओ।

आदेश पाकर साले साहब फिर गए और लौटकर जवाब दिया—तीन नर, दो मादा हैं हुजूर।

नर पिल्ले किस रंग के हैं ?

हुजूर वह देखकर अभी आता हूं।

रहने दो…बैठ जाओ। बादशाह ने कहा।

साले साहब बैठ गए। कुछ देर बाद बीरबल दरबार में आया। तब बादशाह अकबर बोले—बीरबल, आज तुम सुबह महल के पीछे से पिल्लों की आवाजें आ रही हैं, शायद कुतिया ने बच्चे दिए हैं, जाओ देखकर आओ माजरा क्या है !

जी हुजूर। बीरबल चला गया और कुछ देर बाद लौटकर बोला—हुजूर आपने सही फरमाया…कुतिया ने ही बच्चे दिए हैं।

कितने बच्चे हैं ?

हुजूर पांच बच्चे हैं।

कितने नर हैं….कितने मादा।

हुजूर, तीन नर हैं…दो मादा।

नर किस रंग के हैं ?

दो काले हैं, एक बादामी है।

ठीक है बैठ जाओ।

बादशाह अकबर ने अपने साले की ओर देखा, वह सिर झुकाए चुपचाप बैठा रहा। बादशाह ने उससे पूछा—क्यों तुम अब क्या कहते हो ?

उससे कोई जवाब देते न बना।

जोरू का गुलाम ( Story Of Akbar Birbal In Hindi )

Story Of Akbar Birbal In Hindi 2: बादशाह अकबर और बीरबल बातें कर रहे थे। बात मियां-बीवी के रिश्ते पर चल निकली तो बीरबल ने कहा—अधिकतर मर्द जोरू के गुलाम होते हैं और अपनी बीवी से डरते हैं।

मैं नहीं मानता। बादशाह ने कहा।

हुजूर, मैं सिद्ध कर सकता हूं। बीरबल ने कहा।

सिद्ध करो ?

ठीक है, आप आज ही से आदेश जारी करें कि किसी के भी अपने बीवी से डरने की बात साबित हो जाती है तो उसे एक मुर्गा दरबार में बीरबल के पास में जमा करना होगा।

बादशाह ने आदेश जारी कर दिया।

कुछ ही दिनों में बीरबल के पास ढेरों मुर्गे जमा हो गए, तब उसने बादशाह से कहा—हुजूर, अब तो इतने मुर्गे जमा हो गए हैं कि आप मुर्गीखाना खोल सकते हैं। अतः अपना आदेश वापस ले लें।

बादशाह को न जाने क्या मजाक सूझा कि उन्होंने अपना आदेश वापस लेने से इंकार कर दिया। खीजकर बीरबल लौट गया। अगले दिन बीरबल दरबार में आया तो बादशाह अकबर से बोला—हुजूर, विश्वसनीय सूत्रों से पता चला है कि पड़ोसी राजा की पुत्री बेहद खूबसूरत है, आप कहें तो आपके विवाह का प्रस्ताव भेजूं ?

यह क्या कह रहे हो तुम, कुछ तो सोचो, जनानाखाने में पहले ही दो हैं, अगर उन्होंने सुन लिया तो मेरी खैर नहीं। बादशाह ने कहा।

हुजूर, दो मुर्गे आप भी दे दें। बीरबल ने कहा।

बीरबल की बात सुनकर बादशाह झेंप गए। उन्होंने तुरंत अपना आदेश वापस ले लिया।

कौन गधा तम्बाकू खाता है ( Story Of Akbar Birbal In Hindi )

Story Of Akbar Birbal In Hindi 3: बीरबल तम्बाकू खाया करते थे, मगर अकबर बादशाह नहीं खाते थे। एक दिन अकबर बादशाह को लज्जित करने के लिए सैर का बहाना करके तम्बाकू के खेत में ले गए। वहां जाकर उन्होंने एक गधा खेत में चरने के लिए छुड़वा दिया। जब गधे ने तम्बाकू नहीं खाई तो अकबर बादशाह बोले- बीरबल! देखो, तम्बाकू कैसी बुरी चीज है। इसे गधा तक नहीं खाता। 

हां जहांपनाह! यह सच है, गधे तम्बाकू नहीं खाते, इनसान ही खाते हैं। बीरबल ने जवाब दिया।

बीरबल का यह कटाक्ष सुनकर बादशाह अकबर शर्म से पानी-पानी हो गए।

( Story Of Akbar Birbal In Hindi ) सबसे मुश्किल काम

Story Of Akbar Birbal In Hindi 4: एक दिन बीरबल दरबार में देर से पहुँचे। अकबर ने पूछा क्या बात है ? बीरबल आज देर से क्यों आये? बीरबल ने कहा- जहांपनाह, आज मुझे बच्चों को संभालना पडा।

बादशाह को यह सुनकर बहुत आश्चर्य हुआ, बोले यह भी कोई काम हुआ? जहांपनाह बच्चों को संभालने का काम सबसे कठिन है। जब यह काम सिर पर आ पडता है तो कोई भी काम समय पर नहीं हो पाता।

बादशाह बाले- बीरबल बच्चों को बहलाना तो सबसे आसान काम है, उनके हाथ में कोई खाने की चीज दे दो, या कोई खिलोना थमा दो बस काम बन गया।

बीरबल ने कहा- बादशाह सलामत आपको इसका अनुभव नहीं है इसलिए आपको यह काम आसान लगता है। जब आप यह साफ-साफ़ अनुभव करेंगे तो आपको मेरी बात समझ में आ जायेगी। चलिए मैं छोटे बच्चे का अभिनय करता हूं और आप मुझे बहला कर देखिए।

बादशाह तुरन्त राजी हो गये। बीरबल छोटे बच्चे की तरह रोने लगे। अब्बा मुझे दुध चाहिए, बादशाह ने फोरन दुध मंगवा लिया । दुध पीने के बाद बीरबल ने कहा अब मुझे गन्ना चुसना है। Tales of akbar birbal

बादशाह ने गन्ना मंगवाया और उसके छोटे-छोटे टुकडे करवा लिये, मगर बीरबल ने उसे छुआ तक नहीं वह रोता ही रहा।

रोते-रोते वह बोला अब्बा मुझे पूरा गन्न चाहिए। बीरबल का रोना जारी रहा। बादशाह ने हारकर दुसरा गन्ना मंगवाया। मगर बच्चा बने बीरबल रोते-रोते बोले यह गन्ना मुझे नहीं चाहिए, मुझे तो पहले वाला ही पूरा गन्ना चाहिए।

यह सुनकर बादशाह झल्ला उठे, उन्होनें कहा बकवास मत कर चुपचाप चुस ले। कटा हुआ गन्ना अब पुरा कैसे हो सकता है ?

[ही मैं तो पहले वाला गन्ना हीे लूंगा। बादशाह यह सुनकर क्रोधित हो उठे। अरे है कोई यहां ? इस बच्चे को यहां से ले जाओ। बीरबल हंस पडे। बादशाह को स्वीकार करना पडा कि बच्चों को संभालना वास्तव में बहुत मुष्किल काम है।

जितनी लम्बी चादर उतने ही पैर पसारो ( Story Of Akbar Birbal In Hindi )

Story Of Akbar Birbal In Hindi 5: बादशाह अकबर के दरबारियों को अक्सर यह शिकायत रहती थी कि बादशाह हमेशा बीरबल को ही बुद्धिमान बताते हैं, औरों को नहीं।

एक दिन बादशाह ने अपने सभी दरबारियों को दरबार में बुलाया और दो हाथ लम्बी दो हाथ चौड़ी चादर देते हुए कहा—इस चादर से तुम लोग मुझे सर से लेकर पैर तक ढंक दो तो मैं तुम्हें बुद्धिमान मान लूंगा।

सभी दरबारियों ने कोशिश की किंतु उस चादर से बादशाह को पूरा न ढंक सके, सिर छिपाते तो पैर निकल आते, पैर छिपाते तो सिर चादर से बाहर आ जाता। आड़ा-तिरछा लम्बा-चौड़ा हर तरह से सभी ने कोशिश की किंतु सफल न हो सके।

अब बादशाह ने बीरबल को बुलाया और वही चादर देते हुए उन्हें ढंकने को कहा। जब बादशाह लेटे तो बीरबल ने बादशाह के फैले हुए पैरों को सिकोड़ लेने को कहा। बादशाह ने पैर सिकोड़े और बीरबल ने सिर से पांव तक चादर से ढंक दिया। अन्य दरबारी आश्चर्य से बीरबल की ओर देख रहे थे। तब बीरबल ने कहा—जितनी लम्बी चादर उतने ही पैर पसारो।

( Story Of Akbar Birbal In Hindi ) बीरबल और अंगूठी चोर

Story Of Akbar Birbal In Hindi 6: एक दिन भरे दरबार में राजा अकबर नें अपना अंगूठी खो दिया। जैसे ही राजा को यह बात पता चली उन्होंने सिपाहियों से ढूँढने को कहा पर वह नहीं मिला।

राजा अकबर नें बीरबल से दुखी मन से बताया कि वह अंगूठी उनके पिता की अमानत थी जिससे वह बहुत ही प्यार करते थे। बीरबल नें जवाब में कहा! आप चिंता ना करें महाराज, मैं अंगूठी ढून्ढ लूँगा।

बीरबल नें दरबार में बैठे लोगों की तरफ देखा और राजा अकबर से कहा ! महाराज चोरी इन्हीं दर्बर्यों में से ही किसी ने किया है। जिसके दाढ़ी में तिनका फसा है उसी के पास आपका अंगूठी हैा।

जिस दरबारी के पास महाराज का अंगूठी था वह चौंक गया और अचानक से घबराहट के मारे अपनी दाढ़ी को धयान से देखने लगा। बीरबल नें उसकी हरकत को देख लिया और उसी वक्त सैनिकों को आदेश दिया और कहा! इस आदमी की जांच किया जाए।

बीरबल सही था अंगूठी उसी के पास थी। उसको पकड़ लिया गया और कारागार में कैद कर लिया गया। राजा अकबर बहुत खुश हुए।

शिक्षा:

एक दोषी व्यक्ति हमेशा डरता रहता है।

सब लोग एक जैसा सोचते हैं ( Story Of Akbar Birbal In Hindi )

Story Of Akbar Birbal In Hindi 7: दरबार की कार्यवाही चल रही थी। सभी दरबारी एक ऐसे प्रश्न पर विचार कर रहे थे जो राज-काज चलाने की दृष्टि से बेहद अहम न था। सभी एक-एक कर अपनी राय दे रहे थे। बादशाह दरबार में बैठे यह महसूस कर रहे थे कि सबकी राय अलग है। उन्हें आश्चर्य हुआ कि सभी एक जैसे क्यों नहीं सोचते !

तब अकबर ने बीरबल से पूछा, क्या तुम बता सकते हो कि लोगों की राय आपस में मिलती क्यों नहीं ? सब अलग-अलग क्यों सोचते हैं ?

हमेशा ऐसा नहीं होता, बादशाह सलामत ! बीरबल बोला, कुछ समस्याएं ऐसी होती हैं जिन पर सभी के विचार समान होते हैं। इसके बाद कुछ और काम निपटा कर दरबार की कार्यवाही समाप्त हो गई। सभी अपने-अपने घरों को लौट चले।

उसी शाम जब बीरबल और अकबर बाग में टहल रहे थे तो बादशाह ने फिर वही राग छेड़ दिया और बीरबल से बहस करने लगे।

तब बीरबल बाग के ही एक कोने की ओर उंगली से संकेत करता हुआ बोला, वहां उस पेड़ के निकट एक कुआं है। वहां चलिए, मैं कोशिश करता हूं कि आपको समझा सकूं कि जब कोई समस्या जनता से जुड़ी हो तो सभी एक जैसा ही सोचते हैं। मेरे कहने का मतलब यह है कि बहुत सी ऐसी बातें हैं जिनको लेकर लोगों के विचार एक जैसे होते हैं।

अकबर ने कुछ देर कुंए की ओर घूरा, फिर बोले, लेकिन मैं कुछ समझा नहीं, तुम्हारे समझाने का ढंग कुछ अजीब सा है। बादशाह जबकि जानते थे कि बीरबल अपनी बात सिद्ध करने के लिए ऐसे ही प्रयोग करता रहता है।

सब समझ जाएंगे हुजूर ! बीरबल बोला, आप शाही फरमान जारी कराएं कि नगर के हर घर से एक लोटा दूध लाकर बाग में स्थित इस कुएं में डाला जाए। दिन पूर्णमासी का होगा। हमारा नगर बहुत बड़ा है, यदि हर घर से एक लोटा दूध इस कुएं में पड़ेगा तो यह दूध से भर जाएगा।

बीरबल की यह बात सुन अकबर ठहाका लगाकर हंस पड़े। फिर भी उन्होंने बीरबल के कहेनुसार फरमान जारी कर दिया।

शहर भर में मुनादी करवा दी गई कि आने वाली पूर्णमासी के दिन हर घर से एक लोटा दूध लाकर शाही बाग के कुएं में डाला जाए। जो ऐसा नहीं करेगा उसे सजा मिलेगी।

पूर्णमासी के दिन बाग के बाहर लोगों की कतार लग गई। इस बात का विशेष ध्यान रखा जा रहा था कि हर घर से कोई न कोई वहां जरूर आए। सभी के हाथों में भरे हुए पात्र (बरतन) दिखाई दे रहे थे।

बादशाह अकबर और बीरबल दूर बैठे यह सब देख रहे थे और एक-दूसरे को देख मुस्करा रहे थे। सांझ ढलने से पहले कुएं में दूध डालने का काम पूरा हो गया हर घर से दूध लाकर कुएं में डाला गया था। जब सभी वहां से चले गए तो अकबर व बीरबल ने कुएं के निकट जाकर अंदर झांका। कुआं मुंडेर तक भरा हुआ था। लेकिन यह देख अकबर को बेहद हैरानी हुई कि कुएं में दूध नहीं पानी भरा हुआ था। दूध का तो कहीं नामोनिशान तक न था।

हैरानी भरी निगाहों से अकबर ने बीरबल की ओर देखते हुए पूछा, ऐसा क्यों हुआ ? शाही फरमान तो कुएं में दूध डालने का जारी हुआ था, यह पानी कहां से आया ? लोगों ने दूध क्यों नहीं डाला ?

बीरबल एक जोरदार ठहाका लगाता हुआ बोला, यही तो मैं सिद्ध करना चाहता था हुजूर ! मैंने कहा था आपसे कि बहुत सी ऐसी बातें होती हैं जिस पर लोग एक जैसा सोचते हैं, और यह भी एक ऐसा ही मौका था। लोग कीमती दूध बरबाद करने को तैयार न थे। वे जानते थे कि कुएं में दूध डालना व्यर्थ है। इससे उन्हें कुछ मिलने वाला नहीं था। इसलिए यह सोचकर कि किसी को क्या पता चलेगा, सभी पानी से भरे बरतन ले आए और कुएं में उड़ेल दिए। नतीजा…दूध के बजाय पानी से भर गया कुआं।

बीरबल की यह चतुराई देख अकबर ने उसकी पीठ थपथपाई।

बीरबल ने सिद्ध कर दिखाया था कि कभी-कभी लोग एक जैसा भी सोचते हैं।

( Story Of Akbar Birbal In Hindi ) साहूकार और ठग

Story Of Akbar Birbal In Hindi 8: दिल्ली शहर में एक ईमानदार साहूकार रहता था। एक बार दो ठग व्यापारियों के भेष में आए, जिन्होंने स्वयं को चीन का निवासी बताया और साहूकार से प्रार्थना की कि उन लोगों के पास कुछ जेवरात हैं जिन्हें वह बिकवा दें तो बड़ी कृपा होगी। साहूकार ईमानदार था। छल-कपट की बातें उसे मालूम न थीं। उसने स्वाभाविक सरलता से कहा-जब तक मैं किसी को दिखाऊँगा नहीं, तब कत कैसे इनका बिकना संभव होगा? अत: एव आप लोग इन जेवरातों को आज हमारे पास रहने दीजिए, कल दोपहर तक इनका इंतजाम हो जाएगा।

व्यापारियों के रूप में जो ठग थे, उन्होंने कहा-आप बेखटके जेवरों को अपने पास रखिए, पर ध्यान रहे कि जब हम दोनों ही आपके पास जेवरात लेने आएं तो दीजिएगा, केवल किसी एक के आने पर नहीं।

साहूकान ने कहा-ऐसा ही होगा।

सब जेवरात साहूकार के हवाले करके ठगों ने अपना मार्ग लिया। कुछ दूरी का फासला तय करने के बाद उनमें से एक ने वापस आकर साहूकार से कहा-आप कृपा करके जेवरात वापस दे दें। हम लोग कल दोपहर तक आपकी सेवा में हाजिर हो जाएंगे।

साहूकार ने पूछा-आपके दूसरे साथी कहां हैं?

आने वाले ठग ने उंगली से दूसरे ठग की ओर इशारा करके साहूकार को बताया कि उसके आदेश से ही आया है। साहूकार को यकीन हो गया और जेवरात वापस कर दिए।

कुछ समय बाद जब दूसरा साथी आया और जेवरों को वापस मांगा तो साहूकार ने कहा-आपका दूसरा साथी आया और जेवरात लेकर चला गया। मैंने उससे कहा भी कि आपके दूसरे साथी कहां हैं तो वह बोला कि देखो वह वहीं तो हैं, उन्हीं के कहने से तो आया हूँ। ये बातें जब उसने कहीं तो मैंने जेवरात वापस दे दिए।

दूसरे ठग ने साहूकार की एक न सुनी। उसने जेवरात वापस लिए बिना वहां से हटने से इंकार कर दिया और बोला-जब मैंने आपको पहले ही सावधान कर दिया था तो ऐसी बातें क्यों पैदा हुईं? जब तक मैं न आता आपका उसे जेवर देना उचित न था, इसका दंड मैं क्यां भोगूं? आपने जैसा किया वैसा भोगिए।

साहूकार ने नम्रतापूर्वक जवाद दिया-आप भी उस वक्त चौराहे पर खड़े थे, जब आपका दूसरा साथी जेवरात लेने आया था।

ठग का मिजाज गर्म हो गया, वह तैश में आकर बोला-इससे क्या होता है? क्या मैं कहीं पर खड़ा भी नहीं हो सकता? मैंने तो उसे भेजा ही नहीं था।

मामला बढ़ता ही गया। अंत में ठग ने अकबर बादशाह के यहां जाकर सारा हाल कह सुनाया। अकबर बादशाह ने उनके फैसले का भार बीरबल को सौंपा। बीरबल ने साहूकार को बुलवाया। साहूकार ने अपनी सफाई दी और बड़े-बड़े विश्वसनीय महाजनों की गवाही भी दिलवाई। बीरबल को निश्चय हो गया कि दावा झूठा है। परन्तु यह होते हुए भी बिना सबूत दंडित करना ठीक नहीं, यह ख्याल करके बीरबल ठग से बोले-जब तुमने यह कहा था कि तुम दोनों साथ आओ तभी जेवरात वापस किए जाएं तो तुम अकेले ही क्यों आए, तुम्हारा दूसरा साथी कहां है? जब तुम अपने दूसरे साथी को लेकर आओगे तभी जेवरात वापस किए जाएंगे।

जब ठग से कोई जवाब न बना तो बीरबल ने साहूकार को हुक्म दिया-अब जब यह कभी दोनों साथ आएं, इन्हें हमारे पास लाना, यदि अकेले आएं तो भी साथ लाना।

साहूकार इस फैसले से बड़ा प्रसन्न हुआ। अकबर बादशाह ने भी मन ही मन बीरबल की बुद्धि की प्रशंसा की।

सबसे बड़ा हथियार ( Story Of Akbar Birbal In Hindi )

Story Of Akbar Birbal In Hindi 9: अकबर और बीरबल के बीच कभी-कभी ऐसी बातें भी हुआ करती थीं जिनकी परख करने में जान का खतरा रहता था। एक बार अकबर ने बीरबल से पूछा-बीरबल, संसार में सबसे बड़ा हथियार कौन-सा है ? बादशाह सलामत ! संसार में सबसे बड़ा हथियार है आत्मविश्वास। बीरबल ने जवाब दिया।

अकबर ने बीरबल की इस बात को सुनकर अपने दिल में रख लिया और किसी समय इसकी परख करने का निश्चय किया। दैवयोग से एक दिन एक हाथी पागल हो गया। ऐसे में हाथी को जंजीरों में जकड़ कर रखा जाता था।

अकबर ने बीरबल के आत्मविश्वास की परख करने के लिए उधर तो बीरबल को बुलवा भेजा और इधर हाथी के महावत को हुक्म दिया कि जैसे ही बीरबल को आता देखे, वैसे ही हाथी की जंजीर खोल दे।

बीरबल को इस बात का पता नहीं था। जब वे बादशाह अकबर से मिलने उनके दरबार की ओर जा रहे थे तो पागल हाथी को छोड़ा जा चुका था। बीरबल अपनी ही मस्ती में चले जा रहे थे कि उनकी नजर पागल हाथी पर पड़ी, जो चिंघाड़ता हुआ उनकी तरफ आ रहा था।

बीरबल हाजिर जवाब, बेहद बुद्धिमान, चतुर और आत्मविश्वासी थे। वे समझ गए कि बादशाह अकबर ने आत्मविश्वास और बुद्धि की परीक्षा के लिए ही पागल हाथी को छुड़वाया है।

दौड़ता हुआ हाथी सूंड को उठाए तेजी से बीरबल की ओर चला आ रहा था। बीरबल ऐसे स्थान पर खड़े थे कि वह इधर-उधर भागकर भी नहीं बच सकते थे। ठीक उसी वक्त बीरबल को एक कुत्ता दिखाई दिया। हाथी बहुत निकट आ गया था। इतना करीब कि वह बीरबल को अपनी सूंड में लपेट लेता। तभी बीरबल ने झटपट कुत्ते की पिछली दोनों टांगें पकड़ीं और पूरी ताकत से घुमाकर हाथी पर फेंका। बुरा तरह घबराकर चीखता हुआ कुत्ता जब हाथी से जाकर टकराया तो उसकी भयानक चीखें सुनकर हाथी भी घबरा गया और पलटकर भागा।

अकबर को बीरबल की इस बात की खबर मिल गई और उन्हें यह मानना पड़ा कि बीरबल ने जो कुछ कहा है, वह सच है। आत्मविश्वास ही सबसे बड़ा हथियार है।

( Story Of Akbar Birbal In Hindi ) तिनके का सहारा

Story Of Akbar Birbal In Hindi 10: बादशाह अकबर अपने कुछ दरबारीयों के साथ नौका विहार के लिये गये। जब नोका नदी के बीचों-बीच पहूंची तो बादषाह को मजाक सुझा।

बीरबल सहित अपने दरबारीयों को एक तिनका दिखाकर वह बोले- जो इस तिनके के सहारेे नदी पार कर लेगा, उसे मैं एक दिन के लिए बादशाह बना दूंगा। बीरबल बोला यह काम मैं काम कर सकता हूं मगर बादशाह बनने के बाद।

बादशाह अकबर बाले- ठीक है आज के दिन के लिए मैं तुम्हे बादशाह बनाता हू। बीरबल तिनका लेकर नदीे में कुदने को हुए। कुदने से पहले उन्होने अंगरक्षकों से कहा- इस समय मेैं बादशाह हूँ, तुम अपने कर्तव्य का पालन करो।

यह सुनते ही अंगरक्षकों ने उन्हें पकड लिया और बोले- आप बादशाह हेै इसलिए हम आपको जान-जोखिम का काम नहीं करने देंगे। बीरबल ने काफी जद्दोजहद की मगर अंगरक्षकों ने नहीं छोडा, इतने में नोका दूसरे किनारे पर जा लगी।

बादशाह अकबर बोले बीरबल तुम हार गये। हार कहां गया जहांपनाह, इस तिनके के सहारे ही तो मेैंने नदी पार की, यह मेरे पास नहीं होता तो मैं बादशाह नही होता और अंगरक्षक मुझे नदी में कुदने से भला क्यों रोकते ?

बादशाह अकबर हंसकर बोले- बीरबल तुमसे जीतना सचमुच मुश्किल काम है।

मोम का शेर

Story Of Akbar Birbal In Hindi 11: सर्दियों के दिन थे, अकबर का दरबार लगा हुआ था। तभी फारस के राजा का भेजा एक दूत दरबार में उपस्थित हुआ।

राजा को नीचा दिखाने के लिए फारस के राजा ने मोम से बना शेर का एक पुतला बनवाया था और उसे पिंजरे में बंद कर के दूत के हाथों अकबर को भिजवाया, और उन्हे चुनौती दी की इस शेर को पिंजरा खोले बिना बाहर निकाल कर दिखाएं।

बीरबल की अनुपस्थिति के कारण अकबर सोच पड़ गए की अब इस समस्या को कैसे सुलझाया जाए। अकबर ने सोचा कि अगर दी हुई चुनौती पार नहीं की गयी तो जग हसायी होगी। इतने में ही परम चतुर, ज्ञान गुणवान बीरबल आ गए। और उन्होने मामला हाथ में ले लिया।

बीरबल ने एक गरम सरिया मंगवाया और पिंजरे में कैद मोम के शेर को पिंजरे में ही पिघला डाला। देखते-देखते मोम पिघल कर बाहर निकल गया ।

अकबर अपने सलाहकार बीरबल की इस चतुराई से काफी प्रसन्न हुए और फारस के राजा ने फिर कभी अकबर को चुनौती नहीं दी।

बादशाह का गुस्सा ( Story Of Akbar Birbal In Hindi )

Story Of Akbar Birbal In Hindi 12: बादशाह अकबर अपनी बेगम से किसी बात पर नाराज हो गए। नाराजगी इतनी बढ़ गई कि उन्हें बेगम को मायके जाने को कह दिया। बेगम ने सोचा कि शायद बादशाह ने गुस्से में ऐसा कहा है, इसलिए वह मायके नहीं गईं। जब बादशाह ने देखा कि बेगम अभी तक मायके नहीं गई हैं तो उन्होंने गुस्से में कहा—तुम अभी तक यहीं हो, गई नहीं, सुबह होते ही अपने मायके चली जाना वरना अच्छा न होगा। तुम चाहो तो अपनी मनपसंद चीज साथ ले जा सकती हो।

बेगम सिसक कर जनानखाने में चली गईं। वहां जाकर उसने बीरबल को बुलाया। बीरबल बेगम के सामने पेश हो गया। बेगम ने बादशाह की नाराजगी के बारे में बताया और उनके हुक्म को भी बता दिया ।

बेगम साहिबा अगर बादशाह ने हुक्म दिया है तो जाना ही पड़ेगा, और अपनी मनपसंद चीज ले जाने की बाबत जैसा मैं कहता हूं वैसा ही करें, बादशाह की नाराजगी भी दूर हो जाएगी।

बेगम ने बीरबल से कहे अनुसार बादशाह को रात में नींद की दवा दे दी और उन्हें नींद में ही पालकी में डालकर अपने साथ मायके ले आई और एक सुसज्जित शयनकक्ष में सुला दिया। जब बादशाह की नींद खुली तो स्वयं को अनजाने स्थान पर पाकर हैरान हो गए, पुकारा—कोई है ?

उनकी बेगम साहिबा उपस्थित हुईं। बेगम को वहां देखकर वे समझ गए कि वे अपनी ससुराल में हैं। उन्होंने गुस्से से पूछा—तुम हमें भी यहां ले आई, इतनी बड़ी गुस्ताखी कर डाली …।

मेरे सरताज, आपने ही तो कहा था कि अपनी मन पसंद चीज ले जाना…इसलिए आपको ले आई।

यह सुनकर बादशाह का गुस्सा जाता रहा, मुस्कराकर बोले—जरूर तुम्हें यह तरकीब बीरबल ने ही बताई होगी।

बेगम ने हामी भरते हुए सिर हिला दिया।

कुँए का पानी ( Story Of Akbar Birbal In Hindi )

Story Of Akbar Birbal In Hindi 13: एक बार एक आदमी ने अपना कुँआ एक किसान को बेच दिया. अगले दिन जब किसान ने कुँए से पानी खिंचना शुरू किया तो उस व्यक्ति ने किसान से पानी लेने के लिये मना किया. वह बोला, मैने तुम्हें केवल कुँआ बेचा है ना कि कुँए का पानी.

किसान बहुत दुखी हुआ और उसने अकबर के दरबार में गुहार लगाई. उसने दरबार में सबकुछ बताया और अकबर से इंसाफ माँगा.

अकबर ने यह समस्या बीरबल को हल करने के लिये दी. बीरबल ने उस व्यक्ति को बुलाया जिसने कुँआ किसान को बेचा था. बीरबल ने पूछा, तुम किसान को कुँए से पानी क्यों नहीं लेने देते? आखिर तुमने कुँआ किसान को बेचा है. उस व्यक्ति ने जवाब दिया, बीरबल, मैंने किसान को कुँआ बेचा है ना कि कुँए का पानी. किसान का पानी पर कोई अधिकार नहीं है.

बीरबल मुस्कुराया और बोला,बहुत खूब, लेकिन देखो, क्योंकि तुमने कुँआ किसान को बेच दिया है, और तुम कहते हो कि पानी तुम्हारा है, तो तुम्हे अपना पानी किसान के कुँए में रखने का कोई अधिकार नहीं है. अब या तो अपना पानी किसान के कुँए से निकाल लो या फिर किसान को किराय दो.

वह आदमी समझ गया, कि बीरबल के सामने उसकी दाल नहीं गलने वाली और वह माफी माँग कर खिसक लिया.

आँख वाला अँधा ( Story Of Akbar Birbal In Hindi )

Story Of Akbar Birbal In Hindi 14: एक दिन अकबर ने बीरबल से प्रश्न किया-हमारे राज्य में आँखे होते हुए भी अंधो की संख्या कितनी है ? बीरबल ने कहा-हुजूर में आपको निश्चित संख्या तो नहीं बता सकता, लेकिन यह तय है की अपने राज्य में अंधो की अपेक्षा आँख वाले अंधो की संख्या ज्यादा है |

अकबर ने इसे प्रमाणित करने को कहा | बीरबल ने दो दिन में प्रमाण सहित सिध्द करने का दावा किया | दुसरे दिन सुबह बीरबल ने अपने घर के पास वाले रस्ते पर एक चारपाई बिछा दी | चारपाई बनी हुई नहीं थी, इसलिए बीरबल वही बैठकर उसे बुनने लगे |

उन्होंने एक आदमी को कागज़ और कलम देकर अपने पास में बिठा लिया | देखते ही देखते पुरे शहर में यह बात फैल गयी | की बीरबल रास्ते में बैठकर स्वयं चारपाई बना रहा है | लोग वहां आते और बीरबल से पूछते-अरे बीरबल! आप यह क्या कर रहे हैं ? बीरबल कोई जवाब न देकर प्रश्न पूछने वाले आदमी का नाम पास बैठे कागज़ कलम लिए व्यक्ति को लिखवा देता |

धीरे-धीरे यह सूचि काफी लम्बी हो गई | बादशाह तक इसकी सूचना पहुंची तो वे बीरबल को देखने आए | उन्होंने भी वही प्रश्न किया और बीरबल ने सूचि में उनका नाम सबसे ऊपर लिखवा दिया |

अकबर ने सारा माजरा पूछा तो बीरबल बोला- आप सहित सभी देख सकते हैं की में यहाँ बैठ-कर चारपाई बना रहा हूँ | फिर भी सभी ने मुझसे पूछा की में क्या कर रहा हूँ ? हुए न आप सभी आँख वाले अंधे | बादशाह ने अपनी भूल स्वीकार कर बीरबल को इनाम दिया |

भाई जैसा ( Story Of Akbar Birbal In Hindi )

Story Of Akbar Birbal In Hindi 15: बादशाह अकबर तब बहुत छोटे थे, जब उनकी मां का देहांत हुआ था। चूंकि वह बहुत छोटे थे, इसलिए उन्हें मां के दूध की दरकार थी। महल में तब एक दासी रहती थी, जिसका शिशु भी दुधमुंहा था। वह नन्हें अकबर को दूध पिलाने को राजी हो गई। दासी का वह पुत्र व अकबर दोनों साथ-साथ दासी का दूध पीने लगे।

दासी के पुत्र का नाम हुसिफ था। चूंकि हुसिफ व अकबर ने एक ही स्त्री का दुग्धपान किया था, इसलिए वे दूध-भाई हो गए थे। अकबर को भी लगाव था हुसिफ से।

समय बीतता रहा। अकबर बादशाह बन गए और देश के सर्वाधिक शक्तिशाली सम्राट बने। लेकिन हुसिफ एक मामूली दरबारी तक न बन पाया। उसकी मित्रता जुआरियों के साथ थी और कुछ ऐसे लोग भी उसके साथी थे, जो पैसा फिजूल बहाया करते थे। एक समय ऐसा आया जब हुसिफ के पास दो समय के भोजन के लिए भी पैसा पास न था। लोगों ने तब उसे बादशाह के पास जाने को कहा।

हुसिफ ने बादशाह अकबर के पास जाने की तैयारी शुरू कर दी।

हुसिफ के दरबार में पहुंचते ही बादशाह ने उसे ऐसे गले लगाया जैसे उसका सगा भाई ही हो। लंबे अर्से के बाद हुसिफ को देख बादशाह बेहद खुश थे। उन्होंने उसकी हर संभव सहायता करनी चाही।

हुसिफ को अकबर ने दरबार में नौकरी दे दी। रहने के लिए बड़ा मकान, नौकर-चाकर, घोड़ागाड़ी भी दी। निजी खर्च के लिए एक मोटी रकम हर महीने उसको मिलती थी।

अब हुसिफ की जिन्दगी अमन-चैन से गुजर रही थी। उसे किसी चीज की कोई कमी नहीं थी।

यदि तुम्हारी कुछ और जरूरतें हों, तो बेहिचक कह डालो। सब पूरी की जाएंगी। बादशाह ने हुसिफ से कहा।

तब हुसिफ ने जवाब दिया, आपने अब तक जितना दिया है वह काफी है शाही जीवन बिताने को, बादशाह सलामत। आपने मुझे इज्जत बख्शी, सर उठाकर चलने की हैसियत दी। मुझसे ज्यादा खुश और कौन होगा। मेरे लिए यह भी फक्र की बात है कि देश का सम्राट मुझे अपना भाई मानता है। और क्या चाहिए हो सकता है मुझे। कहते हुए उसने सिर खुजाया, होंठों पर अहसान भरी मुस्कान थी। लेकिन लगता था उसे कुछ और भी चाहिए था। वह बोला, मैं महसूस करता हूं कि बीरबल जैसे बुद्धिमान व योग्य व्यक्ति के साथ रहूं। मेरी ख्वाहिश है कि जैसे बीरबल आपका सलाहकार है, वैसा ही मुझे भी कोई सलाह देने वाला हो।

बादशाह अकबर ने हुसिफ की यह इच्छा भी पूरी करने का फैसला किया। उन्होंने बीरबल को बुलाकर कहा, हुसिफ मेरे भाई जैसा है। मैंने उसे जीवन के सभी ऐशो-आराम उपलब्ध करा दिए हैं, लेकिन अब वह तुम्हारे जैसा योग्य सलाहकार चाहता है। तुम अपने जैसा बल्कि यह समझो अपने भाई जैसा कोई व्यक्ति लेकर आओ जो हुसिफ का मन बहला सके। वह बातूनी न हो, पर जो भी बोले, नपा-तुला बोले। उसकी बात का कोई मतलब होना चाहिए। समझ गए न कि मैं क्या चाहता हूं।

पहले तो बीरबल समझ ही न पाया कि बादशाह ऐसा क्यों चाहते हैं। उसे हुसिफ में ऐसी कोई खूबी दिखाई न देती थी।

जी हुजूर ! बीरबल बोला, आप चाहते हैं कि मैं ऐसा आदमी खोजकर लाऊं जो मेरे भाई जैसा हो।

ठीक समझे हो। बादशाह ने कहा।

अब बीरबल सोचने लगा कि ऐसा कौन हो सकता है, जो उसके भाई जैसा हो। हुसिफ भाग्यशाली है जो बादशाह उसे अपना भाई मानते हैं और उसे सारे ऐशो-आराम उपलब्ध करा दिए हैं। लेकिन बीरबल को हुसिफ की यह मांग जची नहीं कि उसके पास भी बीरबल जैसा सलाहकार हो। बादशाह बेहद सम्मान करते थे बीरबल का और बीरबल भी बादशाह पर जान छिड़कता था। लेकिन हुसिफ तो इस लायक कतई नहीं था। अब बीरबल सोच ही रहा था कि समस्या को हल कैसे किया जाए, तभी पास की पशुशाला से सांड़ के रंभाने की आवाज आई। बीरबल तुरंत खड़ा हो गया। आखिरकार उसे अपने भाई जैसा कोई मिल ही गया था।

अगले दिन उस सांड़ के साथ बीरबल महल में जाकर अकबर के सामने खड़ा हो गया।

तुम अपने साथ इस सांड़ को लेकर यहां क्यों आए हो, बीरबल ? अकबर ने पूछा।

यह मेरा भाई है, बादशाह सलामत। बीरबल बोला, हम दोनों एक ही मां का दूध पीकर बड़े हुए हैं….गऊ माता का दूध पीकर। इसलिए यह सांड़ मेरे भाई जैसा है…दूध-भाई। यह बोलता भी बहुत कम है। जो इसकी भाषा समझ लेता है, उसे यह कीमती सलाह भी देता है। इसे हुसिफ को दे दें, मेरे जैसा सलाहकार पाने की उसकी इच्छा पूरी हो जायगी।

बीरबल का यह उत्तर सुनकर अकबर को अपनी गलती का अहसास हुआ। तब उन्हें लगा कि जैसे उन जैसा कोई दूसरा नहीं, वैसे ही बीरबल भी एक ही है।

सब पर भारी बीरबल की चतुराई ( Story Of Akbar Birbal In Hindi )

Story Of Akbar Birbal In Hindi 16: बार अकबर बादशाह का दरबार लगा था। दरबार में सारे दरबारी, पंडित, मंत्री और सामान्यजन भी बैठे हुए थे। उस समय दरबार में हंसी-ठिठोली का माहौल छाया हुआ था। सब उसी में मशगूल थे। अकबर भी बहुत खुश नजर रहे थे। लेकिन एक बात थी जो अकबर को हमेशा ही खटकती रहती थी, वह यह कि राजदरबार के सभी दरबारी बीरबल के फैसले से बहुत जलते थे।

बीरबल के आगे उनके फैसले की एक चलती थी। इसलिए दरबारियों को बीरबल से बहुत ईर्ष्या थी, लेकिन वह बीरबल के सामने बोलने की हिम्मत जुटा नहीं पाते थे। बीरबल की दरबार में अनुपस्थिति होने पर अकबर हमेशा बीरबल की प्रशंसा के पुल बांधते रहते थे। जब बीरबल दरबार में अनुपस्थित रहता था तब दरबारी बीरबल के प्रति द्वेष का भाव रखकर अकबर बादशाह को भड़काने का काम करते रहते थे। लेकिन अकबर को बीरबल की चतुराई पर बहुत भरोसा था।

दरबार में चल रही हंसी-ठिठोली के बीच अकबर ने दरबारियों की परीक्षा लेने का मन ही मन विचार बनाया। उन्होंने सभी दरबारियों से शांत होने को कहा, और बोले-ध्यान से सुनो, तुम सभी को मेरे एक सवाल का जवाब देना है। जो इस सवाल का जवाब सही देगा और उसे साबित कर दिखाएगा उसे मैं बीरबल की जगह अपना मंत्री नियुक्त कर दूंगा।

अकबर ने कहा- देखो तुम सबके लिए बहुत बढ़िया अवसर हाथ आया है। इससे तुम अपने मन के सभी अरमान पूरे कर सकते हो। यह सुनकर सभी दरबारी बहुत खुश हुए। अकबर ने फिर अपना सवालिया बाण छोड़ा और कहा, देखो, तुम्हें यह साबित करना है कि मनुष्य द्वारा निर्मित चीज ज्यादा अच्छी होती है या कुदरत के द्वारा निर्मित। अकबर के मुंह से सवाल सुनते ही सभी दरबारी सोच में पड़ गए। अकबर ने उन्हें पूरे एक हफ्ते का समय दिया और कहा अगले शुक्रवार को जब दरबार लगेगा तो तुम्हें खुद को सबसे श्रेष्ठ साबित करना है।

सब दरबारी अपने-अपने घर को हो लिए। सभी इसी सोच में डूबे थे कि इस बात को कैसे साबित किया जाए। लेकिन किसी में इतनी चतुराई भी तो नहीं थी जितनी कि बीरबल में। सारे दरबारियों में से किसी को भी इस सवाल का हल नहीं मिल पाया। तय समय के अनुसार फिर शुक्रवार के दिन राजदरबार लगा। सभी लोग अपने-अपने आसन पर विराजमान हो गए। हालांकि, बीरबल सबसे पहले पहुंच गए थे। अब राजा ने एक-एक कर सभी से सवाल का जवाब मांगा, पर सभी दरबारी, मंत्री, पंडित अपनी गर्दन झुकाकर खड़े हो गए। अब अकबर से रहा गया।

उन्होंने बीरबल से पूछा। बीरबल ने बड़ा ही चतुराई भरा जवाब दिया, जहांपनाह! इसमें कौन-सी बड़ी बात है। इसका जवाब बहुत ही आसान है। अभी लीजिए कह कर वह अपने कुर्सी से उठकर बाहर चले गए। यह देख दरबारियों में खुसर-फुसर शुरू हो गई। एक कहने लगा- अरे यह क्या? बीरबल तो अकबर को जवाब देने के बजाय दरबार से उठकर बाहर चले गए। अकबर आराम से अपने सिंहासन पर विराजमान हो गए और बीरबल की प्रतीक्षा करने लगे। तभी एक कारागीर हाथों में पत्थरों से निर्मित एक फूलों का बड़ा-सा गुलदस्ता लेकर आया और राजा को गुलदस्ता देकर जाने लगा।

राजा ने गुलदस्ता हाथ में लिया और उसकी सुंदरता देखकर गुलदस्ते की बहुत तारीफ की। अपने खजाने के मंत्री को आदेश दिया कि इस कारीगर को एक हजार स्वर्ण मुद्राएं इनाम के तौर पर दी जाएं। इनाम लेकर कारीगर खुशी-खुशी बाहर चला गया तभी अकबर के बगीचे का माली आया और एक बड़ा-सा गुलदस्ता को राजा को भेंट किया। इतना सुंदर गुलदस्ता देखकर राजा उसकी भी तारीफ किए बिना रह सका।

अकबर ने फिर अपने मंत्री को आदेश दिया और कहा- माली को सौ चांदी की मुद्राएं इनाम के तौर पर दी जाए। बस फिर क्या था, राजा का इतना आदेश हुआ कि बीरबल चतुराई भरा मुंह बनाकर दरबार में दाखिल हुए। पहले तो अकबर बीरबल पर बहुत नाराज हुए और कहने लगे, शायद सभी दरबारी ठीक ही कहते हैं! मैंने ही तुम्हें जरूरत से ज्यादा तवज्जों दी है। इसीलिए तुम यूं बीच में ही राज दरबार छोड़कर चले गए और मेरे सवाल का जवाब भी नहीं दिया।

अकबर का इतना कहना ही हुआ कि बीरबल ने अकबर को प्रणाम करते हुए कहा – जहांपनाह, आप कुछ भूल रहे हैं। अभी-अभी जो दो कारीगर यहां उपस्थिति देकर गए हैं। उन्हें आपके पास भेजने के लिए ही मैं बाहर गया था। आपने यह कैसा न्याय किया, दो कारीगरों के साथ। एक को हजार स्वर्ण मुद्राएं और दूसरे को सिर्फ सौ चांदी की मुद्राएं। अकबर ने जवाब दिया- असली फूलों का गुलदस्ता तो दो दिनों में ही मुरझा जाएगा और यह पत्थर से निर्मित गुलदस्ता कभी भी खराब नहीं होगा इसीलिए।

अकबर का इतना कहना ही था कि बीरबल ने अपना चतुराई भरा बाण छोड़ा और बोले- तो फिर आप भी मान गए ना कि मनुष्य द्वारा निर्मित वस्तु कुदरत के द्वारा निर्मित वस्तु से ज्यादा अच्छी है। अब जहांपनाह की बोलती ही बंद हो गई। वे बीरबल की चतुराई देखकर मन ही मन मुस्काएं और फिर से अपने सिंहासन पर बैठ गए। सिंहासन पर बैठकर अकबर ने फिर एक बार बीरबल की खुले दिल से तारीफ की और सब दरबारी अपना मुंह लटका कर अपने-अपने कुर्सी पर बैठ गए। एक बार फिर बीरबल अपनी चतुराई दिखाने में कामयाब हो गए।

भक्तों के कृष्णा ( Story Of Akbar Birbal In Hindi )

Story Of Akbar Birbal In Hindi 17: एक दिन बादशाह अकबर ने बीरबल से पूछा- तुम्हारे धर्म ग्रंथो में यह लिखा हैं कि हाथी की गुहार सुनकर श्रीकृष्ण जी पैदल दौडे थे। न तो उन्होंने किसी सेवक को ही साथ लिया न सवारी पर ही गये।

इसकी वजह समझ में नही आती, क्या उनके यहां सेवक नही थे ? बीरबल बोले – इसका उत्तर आपको समय आने पर ही दिया जा सकेगा जहांपनाह।

कुछ दिन बीतने पर बीरबल ने एक नौकर को जो शहजादे को इधर-उधर टहलाता था, एक मोम की बनी हुई मूर्ति दी जो कि हुबहु बादशाह के पोते की तरह थी। मूर्ति यथोचित दहने कपडों से सुसज्जित होने के कारण दूर से देखने पर बिलकुल शहज़ादे जैसी मालूम होती थी।

बीरबल ने नौकर को अच्छी तरह समझा दिया कि उसे क्या करना है । जिस तरह तुम नित्य प्रति बादशाह के पोते को लेकर उनके सम्मुख जाते हो उसी तरह आज मूर्ति को लेकर जाना। और बाग में जलाशय के पास फिसल जाने का बहाना कर गिर पडना।

तुम सावधानी से जमीन पर गिरना, लेकिन मूर्ति पानी में जरूर गिरनी चाहिए। यदि तुम्हें इस कार्य में सफलता मिली तो तुम्हें इनाम दिया जायेगां।

उस दिन बादशाह बाग में बैठे थे वही एक जलाशय था नौकर शहजादे को खिाला रहा था। कि अचानक उसका पैर फिसला और उसके हाथ से शहजाद छिटक कर पानी मे जा गिरा।

बादशाह यह देखकर बुरी तरह घबरा गये और उठकर जलाशय की तरफ लपके। कुछ देर बाद मोम की मूर्ति को लिये पानी से बाहर निकले बीरबल भी उस वक्त वहां उपस्थित थे और बोले –

जहापनाहं! आपके पास सेवकों और कनीजों की फैाज है फिर आप स्वयं वह भी नंगे पांव अपने पोते के लिए क्यों दौड पडे ? आखिर सेवक सेविका किस काम आयेंगी ? बादशाह बीरबल का चेहरा देखने लगे, वे समझ नही पा रहे थे कि बीरबल कहना क्या चाहते हैं।

बीरबल ने कुछ देर रूक कर फिर कहा अब भी आप नही समझे तो सुनिये जैसे आपको अपना पेाता प्यारा है। उसी तरह श्रीकृष्ण जी को अपने भक्त प्यारे है। इसलिए उनी पुकार पर ही वे दौडे चले गये थे। यह सुनकर बादषाह को अपनी भूल का एहसास हुआ।

एक पेड़ है पर मालिक दो है ( Story Of Akbar Birbal In Hindi )

Story Of Akbar Birbal In Hindi 18: अकबर बादशाह दरबार लगा कर बैठे थे। तभी राघव और केशव नाम के दो व्यक्ति अपने घर के पास स्थित आम के पेड़ का मामला ले कर आए। दोनों व्यक्तियों का कहना था कि वे ही आम के पेड़ के असल मालिक हैं और दुसरा व्यक्ति झूठ बोल रहा है। चूँकि आम का पेड़ फलों से लदा होता है, इसलिए दोनों में से कोई उसपर से अपना दावा नहीं हटाना चाहता।

मामले की सच्चाई जानने के लिए अकबर राघव और केशव के आसपास रहने वाले लोगो के बयान सुनते हैं। पर कोई फायदा नहीं हो पाता है। सभी लोग कहते हैं कि दोनों ही पेड़ को पानी देते थे। और दोनों ही पेड़ के आसपास कई बार देखे जाते थे। पेड़ की निगरानी करने वाले चौकीदार के बयान से भी साफ नहीं हुआ की पेड़ का असली मालिक राघव है कि केशव है, क्योंकि राघव और केशव दोनों ही पेड़ की रखवाली करने के लिए चौकीदार को पैसे देते थे।

अंत में अकबर थक हार कर अपने चतुर सलाहकार मंत्री बीरबल की सहायता लेते हैं। बीरबल तुरंत ही मामले की जड़ पकड़ लेते है। पर उन्हे सबूत के साथ मामला साबित करना होता है कि कौन सा पक्ष सही है और कौन सा झूठा। इस लिए वह एक नाटक रचते हैं।

बीरबल आम के पेड़ की चौकीदारी करने वाले चौकीदार को एक रात अपने पास रोक लेते हैं। उसके बाद बीरबल उसी रात को अपने दो भरोसेमंद व्यक्तियों को अलग अलग राघव और केशव के घर झूठे समाचार के साथ भेज देते हैं। और समाचार देने के बाद छुप कर घर में होने वाली बातचीत सुनने का निर्देश देते हैं।

केशव के घर पहुंचा व्यक्ति बताता है कि आम के पेड़ के पास कुछ अज्ञात व्यक्ति पके हुए आम चुराने की फिराक में है। आप जा कर देख लीजिये। यह खबर देते वक्त केशव घर पर नहीं होता है, पर केशव के घर आते ही उसकी पत्नी यह खबर केशव को सुनाती है।

केशव बोलता है, हां… हां… सुन लिया अब खाना लगा। वैसे भी बादशाह के दरबार में अभी फेसला होना बाकी है… पता नही हमे मिलेगा कि नहीं। और खाली पेट चोरों से लड़ने की ताकत कहाँ से आएगी; वैसे भी चोरों के पास तो आजकल हथियार भी होते हैं।

आदेश अनुसार झूठा समाचार पहुंचाने वाला व्यक्ति केशव की यह बात सुनकर बीरबल को बता देता है।

राघव के घर पहुंचा व्यक्ति बताता है, आप के आम के पेड़ के पास कुछ अज्ञात व्यक्ति पके हुए आम चुराने की फिराक में है। आप जा कर देख लीजियेगा।

यह खबर देते वक्त राघव भी अपने घर पर नहीं होता है, पर राघव के घर आते ही उसकी पत्नी यह खबर राघव को सुनाती है।

राघव आव देखता है न ताव, फ़ौरन लाठी उठता है और पेड़ की ओर भागता है। उसकी पत्नी आवाज लगाती है, अरे खाना तो खा लो फिर जाना… राघव जवाब देता है कि… खाना भागा नहीं जाएगा पर हमारे आम के पेड़ से आम चोरी हो गए तो वह वापस नहीं आएंगे… इतना बोल कर राघव दौड़ता हुआ पेड़ के पास चला जाता है।

आदेश अनुसार झूठा समाचार पहुंचाने वाला व्यक्ति बीरबल को सारी बात बता देते हैं।

दूसरे दिन अकबर के दरबार में राघव और केशव को बुलाया जाता है। और बीरबल रात को किए हुए परीक्षण का वृतांत बादशाह अकबर को सुना देते हैं जिसमे भेजे गए दोनों व्यक्ति गवाही देते हैं। अकबर राघव को आम के पेड़ का मालिक घोषित करते हैं। और केशव को पेड़ पर झूठा दावा करने के लिए कडा दंड देते हैं। तथा मामले को बुद्धि पूर्वक, चतुराई से सुल्झाने के लिए बीरबल की प्रशंशा करते हैं।

सच ही तो है, जो वक्ती परिश्रम कर के अपनी किसी वस्तु या संपत्ति का जतन करता है उसे उसकी परवाह अधिक होती है।

( Story Of Akbar Birbal In Hindi ) राज्य के कौवों की गिनती

Story Of Akbar Birbal In Hindi 19: एक दिन राजा अकबर और बीरबल राज महल के बगीचे में टहल/घूम रहे थे। बहुत ही सुन्दर सुबह थी, बहुत सारे कौवे तालाब के आस पास उड़ रहे थे। कौवों को देखते ही बादशाह अकबर के मन में एक प्रश्न उत्पन्न हुआ। उनके मन में यह प्रश्न उत्पन्न हुआ कि उनके राज्य में कुल कितने कौवे होंगे?

बीरबल तो उनके साथ ही बगीचे में टहल रह थे तो राजा अकबर नें बीरबल से ही यह प्रश्न कर डाला और पुछा ! बीरबल, आखिर हमारे राज्य में कितने कौवे हैं? यह सुनते ही चालक बीरबल ने तुरंत उत्तर दिया – महाराज, पुरे 95,463 कौवे हैं हमारे राज्य में।

महाराज अकबर इतने तेजी से दिए हुए उत्तर को सुन कर हक्का-बक्का रह गए और उन्होंने बीरबल की परीक्षा लेने का सोचा। महाराज नें बीरबल से दोबारा प्रश्न किया ! अगर तुम्हारे गणना किये गए अनुसार कौवे ज्यादा हुए? बिना किसी संकोच के बीरबल बोले हो सकता है किसी पड़ोसी राज्य के कौवे घूमने आये हों। और कम हुए तो! बीरबल नें उत्तर दिया,  हो सकता है हमारे राज्य के कुछ कौवे अपने किसी अन्य राज्यों के रिश्तेदारों के यहाँ घूमने गए हों।

शिक्षा:

जीवन में शांत मन से विचारों को सुनने और सोचने से, जीवन के हर प्रश्न का उत्तर निकल सकता है।

पंडित जी ( Story Of Akbar Birbal In Hindi )

Story Of Akbar Birbal In Hindi 20: शाम ढलने को थी। सभी आगंतुक धीरे-धीरे अपने घरों को लौटने लगे थे। तभी बीरबल ने देखा कि एक मोटा-सा आदमी शरमाता हुआ चुपचाप एक कोने में खड़ा है। बीरबल उसके निकट आता हुआ बोला, लगता है तुम कुछ कहना चाहते हो। बेहिचक कह डालो जो कहना है। मुझे बताओ, तुम्हारी क्या समस्या है ?

वह मोटा व्यक्ति सकुचाता हुआ बोला, मेरी समस्या यह है कि मैं पढ़ा-लिखा नहीं हूं। मैंने अपनी शिक्षा पर ध्यान नहीं दिया जिसका मुझे खेद है। मैं भी समाज में सिर उठाकर सम्मान से जीना चाहता हूं। पर अब नहीं लगता है ऐसा कभी नहीं हो पाएगा।

नहीं कोई देर नहीं, ऐसा जरूर होगा यदि तुम हिम्मत न हारो और परिश्रम करो। तुममें भी योग्यता है बीरबल ने कहा।

लेकिन ज्ञान पाने में तो सालों लग जाएंगे। मोटे आदमी ने कहा, मैं इतना इंतजार नहीं कर सकता। मैं तो यह जानना चाहता हूँ कि क्या कोई ऐसा तरीका है कि चुटकी बजाते ही प्रसिद्धि मिल जाए।

प्रसिद्धि पाने का ऐसा आसान रास्ता तो कोई नहीं है। बीरबल बोला, यदि तुम वास्तव में योग्य और प्रसिद्ध कहलवाना चाहते हो, तो मेहनत तो करनी ही होगी। वह भी कुछ समय के लिए।

यह सुनकर मोटा आदमी सोच में डूब गया।

नहीं मुझमें इतना धैर्य नहीं है। मोटे आदमी ने कहा, मैं तो तुरंत ही प्रसिद्धि पाकर पंडित जी कहलवाना चाहता हूं।

ठीक है। बीरबल बोला, इसके लिए तो एक ही उपाय है। कल तुम बाजार में जाकर खड़े हो जाना। मेरे भेजे आदमी वहां होंगे, जो तुम्हें पंडित जी कहकर पुकारेंगे। वे बार-बार जोर-जोर से ऐसा कहेंगे। इससे दूसरे लोगों का ध्यान इस ओर जाएगा, वे भी तुम्हें पंडित जी कहना शुरू कर देंगे। ऐसा होना स्वाभाविक भी है। लेकिन हमारा नाटक तभी सफल होगा जब तुम गुस्सा दिखाते हुए उन पर पत्थर फेंकने लगोगे या हाथ में लाठी लेकर उनको दौड़ाना होगा तुम्हें। लेकिन सतर्क रहना, गुस्से का सिर्फ दिखावा भर करना है तुम्हें। किसी को चोट नहीं पहुंचनी चाहिए।

उस समय तो वह मोटा आदमी कुछ समझ नहीं पाया और घर लौट गया।

अगली सुबह वह मोटा आदमी बीरबल के कहे अनुसार व्यस्त बाजार में जाकर खड़ा हो गया। तभी बीरबल के भेजे आदमी वहां आ पहुंचे और तेज स्वर में कहने लगे- पंडितजी, पंडितजी, पंडितजी…।

मोटे आदमी ने यह सुन अपनी लाठी उठाई और भाग पड़ा उन आदमियों के पीछे। जैसे सच ही में पिटाई कर देगा। बीरबल के भेजे आदमी वहां से भाग निकले, लेकिन पंडितजी..पंडितजी…का राग अलापना उन्होंने नहीं छोड़ा। कुछ ही देर बाद आवारा लड़कों का वहां घूमता समूह पंडितजी…पंडितजी… चिल्लाता हुआ उस मोटे आदमी के पास आ धमका।

बड़ा मजेदार दृश्य उपस्थित हो गया था। मोटा आदमी लोगों के पीछे दौड़ रहा था और लोग पंडितजी…पंडितजी… कहते हुए नाच-गाकर चिल्ला रहे थे।

अब मोटा आदमी पंडितजी के नाम से प्रसिद्ध हो गया। जब भी लोग उसे देखते तो पंडितजी कहकर ही संबोधित करते। अपनी ओर से तो लोग यह कहकर उसका मजाक उड़ाते थे कि वह उन पर पत्थर फेंकेगा या लाठी लेकर उनके पीछे दौड़ेगा। लेकिन उन्हें क्या पता था कि मोटा तो चाहता ही यही था। वह प्रसिद्ध तो होने ही लगा था।

इसी तरह महीनों बीत गए।

मोटा आदमी भी थक चुका था। वह यह भी समझ गया था कि लोग उसे सम्मानवश पंडितजी नहीं कहते, बल्कि ऐसा कहकर तो वे उसका उपहास करते हैं। लोग जान गए थे कि पंडित कहने से उसे गुस्सा आ जाता है। वह सोचता था कि शायद लोग मुझे पागल समझते हैं। यह सोचकर वह इतना परेशान हो गया कि फिर से बीरबल के पास जा पहुंचा।

वह बोला, मैं मात्र पंडितजी कहलाना नहीं चाहता। वैसे मुझे स्वयं को पंडित कहलवाना पसंद है और कुछ समय तक यह सुनना मुझे अच्छा भी लगा। लेकिन अब मैं थक चुका हूं। लोग मेरा सम्मान नहीं करते, वो तो मेरा मजाक उड़ाते हैं।

मोटे आदमी को वास्तविकता का आभास होने लगा था।

मोटे आदमी को यह कहता देख बीरबल हंसता हुआ यह बोला, मैंने तो तुमसे पहले ही कह दिया था कि तुम बहुत समय तक ऐसा नहीं कर पाओगे। लोग तुम्हें वह सब कैसे कह सकते हैं, जो तुम हो ही नहीं। क्या तुम उन्हें मूर्ख समझते हो ? जाओ, अब कुछ समय किसी दूसरे शहर में जाकर बिताओ। जब लौटो तो उन लोगों को नजरअंदाज कर देना जो तुम्हें पंडितजी कहकर पुकारें। एक अच्छे, सभ्य व्यक्ति की तरह आचरण करना। शीघ्र ही लोग समझ जाएंगे कि पंडितजी कहकर तुम्हारा उपहास करने में कुछ नहीं रक्खा और वे ऐसा कहना छोड़ देंगे।

मोटे आदमी ने बीरबल के निर्देश पर अमल किया।

जब वह कुछ माह बाद दूसरे शहर से लौटकर आया तो लोगों ने उसे पंडितजी कहकर परेशान करना चाहा, लेकिन उसने कोई ध्यान न दिया। अब वह मोटा आदमी खुश था कि लोग उसे उसके असली नाम से जानने लगे हैं। वह समझ गया था कि प्रसिद्धि पाने की सरल राह कोई नहीं है।

बीरबल की पैनी नजर ( Story Of Akbar Birbal In Hindi )

Story Of Akbar Birbal In Hindi 21: बीरबल बहुत नेक दिल इंसान थे। वह सैदव दान करते रहते थे और इतना ही नहीं, बादशाह से मिलने वाले इनाम को भी ज्यादातर गरीबों और दीन-दुःखियों में बांट देते थे, परन्तु इसके बावजूद भी उनके पास धन की कोई कमी न थी। दान देने के साथ-साथ बीरबल इस बात से भी चौकन्ने रहते थे कि कपटी व्यक्ति उन्हें अपनी दीनता दिखाकर ठग न लें।

ऐसे ही अकबर बादशाह ने दरबारियों के साथ मिलकर एक योजना बनाई कि देखें कि सच्चे दीन दुःखियों की पहचान बीरबल को हो पाती है या नही। बादशाह ने अपने एक सैनिक को वेश बदलवाकर दीन-हीन अवस्था में बीरबल के पास भेजा कि अगर वह आर्थिक सहायता के रूप में बीरबल से कुछ ले आएगा, तो अकबर की ओर से उसे इनाम मिलेगा।

एक दिन जब बीरबल पूजा-पाठ करके मंदिर से आ रहे थे तो भेष बदले हुए सैनिक ने बीरबल के सामने आकर कहा,हुजूर दीवान! मैं और मेरे आठ छोटे बच्चे हैं, जो आठ दिनों से भूखे हैं….भगवान का कहना है कि भूखों को खाना खिलाना बहुत पुण्य का कार्य है, मुझे आशा है कि आप मुझे कुछ दान देकर अवश्य ही पुण्य कमाएंगे।

बीरबल ने उस आदमी को सिर से पांव तक देखा और एक क्षण में ही पहचान लिया कि वह ऐसा नहीं है, जैसा वह दिखावा कर रहा है।

बीरबल मन ही मन मुस्कराए और बिना कुछ बोले ही उस रास्ते पर चल पडे़ जहां से होकर एक नदी पार करनी पड़ती थी। वह व्यक्ति भी बीरबल के पीछे-पीछे चलता रहा। बीरबल ने नदी पार करने के लिए जूती उतारकर हाथ में ले ली। उस व्यक्ति ने भी अपने पैर की फटी पुरानी जूती हाथ में लेने का प्रयास किया।

बीरबल नदी पार कर कंकरीले मार्ग आते ही दो-चार कदम चलने के बाद ही जूती पहन लेता। बीरबल यह बात भी गौर कर चुके थे कि नदी पार करते समय उसका पैर धुलने के कारण वह व्यक्ति और भी साफ-सुथरा, चिकना, मुलायम गोरी चमड़ी का दिखने लगा था इसलिए वह मुलायम पैरों से कंकरीले मार्ग पर नहीं चल सकता था।

दीवानजी! दीन ट्टहीन की पुकार आपने सुनी नहीं?पीछे आ रहे व्यक्ति ने कहा।

बीरबल बोले, जो मुझे पापी बनाए मैं उसकी पुकार कैसे सुन सकता हूँ?

क्या कहा? क्या आप मेरी सहायता करके पापी बन जांएगे?

हां, वह इसलिए कि शास्त्रों में लिखा है कि बच्चे का जन्म होने से पहले ही भगवान उसके भोजन का प्रबन्ध करते हुए उसकी मां के स्तनों में दूध दे देता है, उसके लिए भोजन की व्यव्स्था भी कर देता है। यह भी कहा जाता है कि भगवान इन्सान को भूखा उठाता है पर भूखा सुलाता नहीं है। इन सब बातों के बाद भी तुम अपने आप को आठ दिन से भूखा कह रहे हो।

इन सब स्थितियों को देखते हुए यहीं समझना चाहिये कि भगवान तुमसे रूष्ट हैं और वह तुम्हें और तुम्हारे परिवार को भूखा रखना चाहते हैं लेकिन मैं उसका सेवक हूँ, अगर मैं तुम्हारा पेट भर दूं तो ईश्वर मुझ पर रूष्ट होगा ही। मैं ईश्वर के विरूध्द नहीं जा सकता, न बाबा ना! मैं तुम्हें भोजन नहीं करा सकता, क्योंकि यह सब कोई पापी ही कर सकता है।

बीरबल का यह जबाब सुनकर वह चला गया।

उसने इस बात की बादशाह और दरबारियों को सूचना दी।

बादशाह अब यह समझ गए कि बीरबल ने उसकी चालाकी पकड़ ली है।

अगले दिन बादशाह ने बीरबल से पूछा, बीरबल तुम्हारे धर्म-कर्म की बड़ी चर्चा है पर तुमने कल एक भूखे को निराश ही लौटा दिया, क्यों?

आलमपनाह! मैंने किसी भूखे को नहीं, बल्कि एक ढोंगी को लौटा दिया था और मैं यह बात भी जान गया हूँ कि वह ढोंगी आपके कहने पर मुझे बेवकूफ बनाने आया था।

अकबर ने कहा, बीरबल! तुमनें कैसे जाना कि यह वाकई भूखा न होकर, ढोंगी है?

उसके पैरों और पैरों की चप्पल देखकर। यह सच है कि उसने अच्छा भेष बनाया था, मगर उसके पैरों की चप्पल कीमती थी।

बीरबल ने आगे कहा, माना कि चप्पल उसे भीख में मिल सकती थी, पर उसके कोमल, मुलायम पैर तो भीख में नहीं मिले थे, इसलिए कंकड क़ी गड़न सहन न कर सके।

इतना कहकर बीरबल ने बताया कि किस प्रकार उसने उस मनुष्य की परीक्षा लेकर जान लिया कि उसे नंगे पैर चलने की भी आदत नहीं, वह दरिद्र नहीं बल्कि किसी अच्छे कुल का खाता कमाता पुरूष है।

बादशाह बोले, क्यों न हो, वह मेरा खास सैनिक है।फिर बहुत प्रसन्न होकर बोले,सचमुच बीरबल! माबदौलत तुमसे बहुत खुश हुए! तुम्हें धोखा देना आसान काम नहीं है।

बादशाह के साथ साजिश में शामिल हुए सभी दरबारियों के चेहरे बुझ गए।

किसका अफसर ( Story Of Akbar Birbal In Hindi )

Story Of Akbar Birbal In Hindi 22: एक बार वजीर अबुल फजल ने अकबर बादशाह के सामने बीरबल से कहा- बीरबल, तुम्हें अकबर बादशाह ने सुअर और कुत्तों का अफसर नियुक्त किया है।

इस पर बीरबल ने कहा- बहुत खूब, तब तो आपको भी मेरी आज्ञा में रहना पड़ेगा।

यह सुनते ही अकबर बादशाह हंस पड़े और वजीर अबुल फजल ने लज्जित होकर अपना सिर सुका लिया।

कल, आज और कल ( Story Of Akbar Birbal In Hindi )

Story Of Akbar Birbal In Hindi 23: एक दिन बादशाह अकबर ने ऐलान किया कि जो भी मेरे सवालों का सही जवाब देगा उसे भारी ईनाम दिया जाएगा। सवाल कुछ इस प्रकार से थे-

1. ऐसा क्या है जो आज भी है और कल भी रहेगा ?

2. ऐसा क्या है जो आज भी नहीं है और कल भी नहीं होगा ?

3. ऐसा क्या है जो आज तो है लेकिन कल नहीं होगा ?

इन तीनों सवालों के उदाहरण भी देने थे।

किसी को भी चतुराई भरे इन तीनों सवालों का जवाब नहीं सूझ रहा था। तभी बीरबल बोला, हुजूर ! आपके सवालों का जवाब मैं दे सकता हूं, लेकिन इसके लिए आपको मेरे साथ शहर का दौरा करना होगा। तभी आपके सवाल सही ढंग से हल हो पाएंगे।

अकबर और बीरबल ने वेश बदला और सूफियों का बाना पहनकर निकल पड़े। कुछ ही देर बाद वे बाजार में खड़े थे। फिर दोनों एक दुकान में घुस गए। बीरबल ने दुकानदार से कहा, हमें बच्चों की पढ़ाई के लिए मदरसा बनाना है, तुम हमें इसके लिए हजार रुपये दे दो। जब दुकानदार ने अपने मुनीम से कहा कि इन्हें एक हजार रुपये दे दो तो बीरबल बोला, जब मैं तुमसे रुपये ले रहा हूंगा तो तुम्हारे सिर पर जूता मारूंगा। हर एक रुपये के पीछे एक जूता पड़ेगा। बोलो, तैयार हो ?

यह सुनते ही दुकानदार के नौकर का पारा चढ़ गया और वह बीरबल से दो-दो हाथ करने आगे बढ़ आया। लेकिन दुकानदार ने नौकर को शांत करते हुए कहा, मैं तैयार हूँ, लेकिन मेरी एक शर्त है। मुझे विश्वास दिलाना होगा कि मेरा पैसा इसी नेक काम पर खर्च होगा।

ऐसा कहते हुए दुकानदार ने सिर झुका दिया और बीरबल से बोला कि जूता मारना शुरू करें। तब बीरबल व अकबर बिना कुछ कहे-सुने दुकान से बाहर निकल आए।

दोनों चुपचाप चले जा रहे थे कि तभी बीरबल ने मौन तोड़ा, बंदापरवर ! दुकान में जो कुछ हुआ उसका मतलब है कि दुकानदार के पास आज पैसा है और उस पैसे को नेक कामों में लगाने की नीयत भी, जो उसे आने वाले कल (भविष्य) में नाम देगी। इसका एक मतलब यह भी है कि अपने नेक कामों से वह जन्नत में अपनी जगह पक्की कर लेगा। आप इसे यूं भी कह सकते हैं कि जो कुछ उसके पास आज है, कल भी उसके साथ होगा। यह आपके पहले सवाल का जवाब है।

फिर वे चलते हुए एक भिखारी के पास पहुंचे। उन्होंने देखा कि एक आदमी उसे कुछ खाने को दे रहा है और वह खाने का सामान उस भिखारी की जरूरत से कहीं ज्यादा है। तब बीरबल उस भिखारी से बोला, हम भूखे हैं, कुछ हमें भी दे दो खाने को।

यह सुनकर भिखारी बरस पड़ा, भागो यहां से। जाने कहां से आ जाते हैं मांगने।

तब बीरबल बादशाह से बोला, यह रहा हुजूर आपके दूसरे सवाल का जवाब। यह भिखारी ईश्वर को खुश करना नहीं जानता। इसका मतलब यह है कि जो कुछ इसके पास आज है, वो कल नहीं होगा।

दोनों फिर आगे बढ़ गए। उन्होंने देखा कि एक तपस्वी पेड़ के नीचे तपस्या कर रहा है। बीरबल ने पास जाकर उसके सामने कुछ पैसे रखे। तब वह तपस्वी बोला, इसे हटाओ यहां से। मेरे लिए यह बेईमानी से पाया गया पैसा है। ऐसा पैसा मुझे नहीं चाहिए।

अब बीरबल बोला, हुजूर ! इसका मतलब यह हुआ कि अभी तो नहीं है लेकिन बाद में हो सकता है। आज यह तपस्वी सभी सुखों को नकार रहा है। लेकिन कल यही सब सुख इसके पास होंगे।

और हुजूर ! चौथी मिसाल आप खुद हैं। पिछले जन्म में आपने शुभ कर्म किए थे जो यह जीवन आप शानो-शौकत के साथ बिता रहे हैं, किसी चीज की कोई कमी नहीं। यदि आपने इसी तरह ईमानदारी और न्यायप्रियता से राज करना जारी रखा तो कोई कारण नहीं कि यह सब कुछ कल भी आपके पास न हो। लेकिन यह न भूलें कि यदि आप राह भटक गए तो कुछ साथ नहीं रहेगा।

अपने सवालों के बुद्धिमत्तापूर्ण चतुराई भरे जवाब सुनकर बादशाह अकबर बेहद खुश हुए।

( Story Of Akbar Birbal In Hindi ) आदमी एक पर रूप तीन

Story Of Akbar Birbal In Hindi 24: एक बार बादशाह अकबर ने बीरबल से पूछा- क्या तुम हमें तीन तरह की खूबियां एक ही आदमी में दिखा सकते हो?

जी हुजूर, पहली तोते की, दूसरी शेर की, तीसरी गधे की। परन्तु आज नहीं, कल।  बीरबल ने कहा।

ठीक है, तुम्हें कल का समय दिया जाता है। बादशाह ने इजाजत देते हुए कहा।

अगले दिन बीरबल एक व्यक्ति को पालकी में डालकर लाया और उसे पालकी से बाहर निकाला। फिर उस आदमी को शराब का एक पैग दिया। शराब पीकर वह आदमी डरकर बादशाह से विनती करने लगा- हुजूर! मुझे माफ कर दो। मैं एक बहुत गरीब आदमी हूं। 

बीरबल ने बादशाह को बताया- यह तोते की बोली है। 

कुछ देर बाद उस आदमी को एक पैग और दिया तो वह नशे में बादशाह से बोला-  अरे जाओ, तुम दिल्ली के बादशाह हो तो क्या, हम भी अपने घर के बादशाह हैं। हमें ज्यादा नखरे मत दिखाओ। 

बीरबल ने बताया- यह शेर की बोली है। कुछ देर बाद उस आदमी को एक पैग और दिया तो वह नशे में एक तरफ गिर गया और नशे में ऊटपटांग बड़बड़ाने लगा।

बीरबल ने उसे एक लात लगाते हुए बादशाह से कहा- हुजूर! यह गधे की बोली है। 

बादशाह बहुत खुश हुए। उन्होंने बीरबल को बहुत-सा इनाम दिया।

मैं बडा या इंद्र ? ( Story Of Akbar Birbal In Hindi )

Story Of Akbar Birbal In Hindi 25: एक सुबह अकबर और बीरबल बगीचे में घुमने निकले, घुमते हुए वे स्वर्ग नर्क की बातें कर रहे थे। बातो ही बातों में स्वर्ग के राजा इंद्र की बात चल पडी। अकबर ने बीरबल से पूछा- बीरबल राजा इंद्रा बडा हैं या मैं ? जो सही बात हो वही कहना ।

बीरबल उलझन में पड गये उन्होने सोचा यदि मैं इंद्र को बडा कहूंगा तो बादशाह नाराज होंगे, यदि मैं बादशाह को बडा कहूंगा तो वह प्रमाण मांगेंगे। मैं प्रमाण कहां से लाऊंगा ? बीरबल कुछ नही बोले। बादशाहअकबर ने उन्हें खामोश देखा तो जिद करने लगे। उन्होने सोचा कि शायद बीरबल के पास इस प्रश्न का कोई उत्तर नही है।

बीरबल कुछ भी करो मुझे इस प्रश्न का उत्तर इसी वक्त चाहिए।

जहाँपनाह इंद्र का और आपका क्या मुकाबला। आप आप हैं, और इंद्र इंद्र है। नहीं-नहीं मुझे यह गोलमोल जवाब नही चाहिए। साफ-साफ बताओ मैं बडा हूं या इंद्र। बीरबल ने एक गहरी सांस ली फिर बोले- जहांपनाह इंद्र से बडे आप है।

बादशाह मन नही मन बहुत खुश हुए लेकिन इतनी सरलता से बीरबल को छुटकारा भला कहां मिलने वाला था। वही हुआ जैसा बीरबल ने सोचा था।

बादशाह बोले- तुम मुझे इंद्र से बडा कहते हो इसका कोई प्रमाण हैं तुम्हारें पास ?

बीरबल को तो मालूम ही था कि बादशाह प्रमाण मांगेंगे, फिर उन्होंने उत्तर दिया, जब ब्रम्हा जी ने इस सृष्टि की रचना की तब उन्होंने दो पुतले बनाये थे एक आपका और एक इंद्र का । दोनो को उन्होंने तराजू के एक-एक पलडे में रखा आप बडे थे इसलिए आप वनज में भारी थे, आपका पलडा नीचे आ गया।

ब्रम्हा जी ने आपको यहां का अर्थात प्रथ्वी का राज्य दिया। इंद्र छोटे थे इसलिए वह वजन में हल्के थे उनका पलडा ऊपर उठ गया इसलिए ब्रम्हा जी ने उन्हे स्वर्ग का राज्य दिया। इस प्रकार ब्रम्हा जी ने ही उस समय प्रमाणित कर दिया था कि आप ही बडे है।

बीरबल की खिचड़ी ( Story Of Akbar Birbal )

Story Of Akbar Birbal In Hindi 26: यह एक ठण्ड के मौसम की सुबह थी। राजा अकबर और बीरबल सैर कर रहे थे। उसी वक्त बीरबल के मन में एक विचार आया और वो राजा अकबर के सामने बोल पड़े एक आदमी/मनुष्य पैसे के लिए कुछ भी कर सकता हैं। यह सुनते ही अकबर नें पास के झील के पानी में अपनी उँगलियों को डाला और झट से निकाल दिया, पानी बहुत ही ठंडा होने के कारण।

अकबर बोले क्या कोई ऐसा व्यक्ति है जो पैसे के लिए पूरी रात इस झील के ठन्डे पानी में खड़ा रह सके। बीरबल नें कहा,  मुझे पूरा यकीं हैं मैं किसी ना किसी ऐसे व्यक्ति को जरूर ढून्ढ लूँगा। यह सुनते ही अकबर नें बीरबल से कहा, अगर तुम इस प्रकार के किसी मनुष्य को हमारे पास ले कर आओगे और वह यह कार्य करने में सफल हो गया तो हम उसे सौ स्वर्ण मुद्राएँ देंगे।

अगले ही दिन बीरबल खोज में लग गए और उन्हें ऐसा आदमी मिल गया जो बहुत ही गरीब था और सौ स्वर्ण मुद्राओं के लिए उस झील के पानी में पूरी रात खड़े रहने को राज़ी हो गया। वह आदमी झील के पानी में जा कर खड़े हो गया। राजा अकबर के सैनिक भी उस गरीब मनुष्य को रात भर पहरा देने के लिए झील के पास खड़े थे। वह पूरी रात उस झील के पानी में गले तक खड़ा रहा। अगले दिन सुबह उस आदमी को दरबार में राजा अकबर के पास लाया गया। बादशाह अकबर नें उस व्यक्ति से पूछा,  तुम पूरी रात कैसे इतने ठन्डे पानी में अपने सर तक डूब कर रह पाए।

उस गरीब व्यक्ति नें उत्तर में कहा,  हे महाराज में पूरी रात आपके महल में जलते हुए एक दीप को रातभर देखता रहा, जिससे की मेरा ध्यान ठण्ड से दूर रहे। अकबर ने यह सुनते ही कहा,  ऐसे व्यक्ति को कोई इनाम नहीं मिलेगा जिसने पूरी रात मेरे महल के दीप की गर्माहट से ठन्डे पानी में समय बिताया हो।

यह सुन कर वह गरीब आदमी बहुत दुखी हुआ और बीरबल से उसने मदद मांगी। अगले दिन बीरबल दरबार में नहीं गए। जब राजा परेशान हुए तो उन्होंने अपने सैनिकों को उनके घर भेजा। जब सैनिक बीरबल के घर से लौटे, तो उन्होंने राजा अकबर से कहा कि जब तक बीरबल की खिचड़ी नहीं पकेगी वह दरबार में नहीं आएंगे। राजा कुछ घंटों के लिए रुके और उसी दिन शाम को वह स्वयं बीरबल के घर गए। जब वह वह पहुंचे तो उन्होंने देखा कि बीरबल कुछ लकड़ियों में आग लगा कर निचे बैठे थे, और कुछ 5 फीट ऊपर एक मिटटी के एक कटोरे में खिचड़ी पकाने के लिए लटका रखा था।

यह देखते ही राजा और उनके सैनिक हँस पड़े। अकबर बोल पड़े, यह खिचड़ी कैसे पक सकती है जबकी चावल से भरा कटोरा तो आग से बहुत दूर है।

बीरबल नें उत्तर दिया, अगर कोई आदमी इतनी दूर से एक दीपक की गर्मी से पूरी रात झील के ठंडे पानी में समयबिता सकता है तो यह किचड़ी क्यों नहीं पक सकती है।

राजा अकबर को अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने उस गरीब आदमी को उसका इनाम(सौ स्वर्ण मुद्राएँ) प्रदान किया।

शिक्षा:

जीवन में दुसरे लोगों की मेहनत/परिश्रम के महत्व को समझना चाहिए और हर किसी व्यक्ति को सम्मान देना चाहिए।

टेढा सवाल ( Story Of Akbar Birbal In Hindi )

Story Of Akbar Birbal In Hindi 27: एक दिन अकबर और बीरबल वन-विहार के लिए गए। एक टेढे पेड की ओर इशारा करके अकबर ने बीरबल से पूछा यह दरख्त टेढा क्यों हैं ? बीरबल ने जवाब दिया यह इस लिए टेढा हैं क्योंकि ये जंगल के तमाम दरख्तो का साला हैं। बादशाह ने पूछा तुम ऐसा कैसे कह सकते हो? बीरबल ने कहा दुनिया में ये बात मशहुर हैं कि कुत्ते की दुम और साले हमेशा टेढे होते हैं। अकबर ने पूछा क्या मेरा साला भी टेढा है? बीरबल ने फौरन कहा बेशक जहांपनाह! अकबर ने कहा फिर मेरे टेढे साले को फांसी चढा दो!

एक दिन बीरबल ने फांसी लगाने की तीन तक्ते बनवाए  एक सोने का, एक चांदी का और एक लोहे का। उन्हें देखकर अकबर ने पूछा- तीन तख्ते किसलिए? बीरबल ने कहा गरीबनवाज, सोने का आपके लिए, चांदी का मेरे लिए और लोहे का तख्ता सरकारी साले साहब के लिए। अकबर ने अचरज से पूछा मुझे और तुम्हे फांसी किसलिए? बीरबल ने कहा क्यों नहीं जहांपनाह आखिर हम भी तो किसी के साले हैं। बादशाह अकबर हंस पडे, सरकारी साले साहब के जान में जान आई। वह बाइज्जत बरी हो गया।

( Story Of Akbar Birbal In Hindi ) जूता कितने का पड़ा?

Story Of Akbar Birbal In Hindi 28: आगरा केवल ताजमहल के लिए ही नहीं जूतों के लिए भी प्रसिद्ध रहा है। बादशाह अकबर के जमाने से ही जूतों का उद्योग प्रगति पर था। स्वयं बादषाह आगरा के बेहतरीन जूते पहनने के शौकीन थे।

एक बार बादशाह अकबर ने बडी खोजबीन के बाद अपने लिये किमती जूते मंगवाये। उस दिन दरबार में समा्रट के जूतों की चर्चा चल रही थी। हरकोई बादशाह अकबर की चापलून में उनके जूतों की तारीफ के पूल बांध रहा था।

कुछ देर बाद दरबार में बीरबल ने कदम रखा तो उन्हें भी बादशाह अकबर के जूतो के बारे में बताया गया। जूते देखकर बीरबल ने बादशाह अकबर सलामत से पूछा ?

आलमपनाह यह जूते कितने के है ? पुरे दो सौ रूपये के। फिर एक जूता कितने का पडा ? बीरबल ने पुछा? सौ रूपये का बादशाह ने तुरन्त उत्तर दिया। किन्तु तभी उनका ध्यान अपने उत्तर पर गया तो शरमाकर रह गये।

बेचारे दरबारीयों से उस समय न हंसते बन रहा था न ही रोते। बीरबल का सवाल ही एसा था।

अकबर बीरबल की पहली मुलाकात ( Story Of Akbar Birbal In Hindi )

Story Of Akbar Birbal In Hindi 29: अकबर को शिकार का बहुत शौक था. वे किसी भी तरह शिकार के लिए समय निकल ही लेते थे. बाद में वे अपने समय के बहुत ही अच्छे घुड़सवार और शिकरी भी कहलाये. एक बार राजा अकबर शिकार के लिए निकले, घोडे पर सरपट दौड़ते हुए उन्हें पता ही नहीं चला और केवल कुछ सिपाहियों को छोड़ कर बाकी सेना पीछे रह गई. शाम घिर आई थी, सभी भूखे और प्यासे थे, और समझ गए थे की वो रास्ता भटक गए हैं. राजा को समझ नहीं आ रहा था की वह किस तरफ़ जाएं.

कुछ दूर जाने पर उन्हें एक तिराहा नज़र आया. राजा बहुत खुश हुए चलो अब तो किसी तरह वे अपनी राजधानी पहुँच ही जायेंगे. लेकिन जाएं तो जायें किस तरफ़. राजा उलझन में थे. वे सभी सोच में थे किंतु कोई युक्ति नहीं सूझ रही थी. तभी उन्होंने देखा कि एक लड़का उन्हें सड़क के किनारे खड़ा-खडा घूर रहा है. सैनिकों ने यह देखा तो उसे पकड़ कर राजा के सामने पेश किया.

राजा ने कड़कती आवाज़ में पूछा, ऐ लड़के, आगरा के लिए कौन सी सड़क जाती है? लड़का मुस्कुराया और कहा, जनाब, ये सड़क चल नहीं सकती तो ये आगरा कैसे जायेगी. महाराज जाना तो आपको ही पड़ेगा और यह कहकर वह खिलखिलाकर हंस पड़ा.

सभी सैनिक मौन खड़े थे, वे राजा के गुस्से से वाकिफ थे. लड़का फ़िर बोला, जनाब, लोग चलते हैं, रास्ते नहीं. यह सुनकर इस बार राजा मुस्कुराया और कहा, नहीं, तुम ठीक कह रहे हो. तुम्हारा नाम क्या है, अकबर ने पूछा. मेरा नाम महेश दास है महाराज, लड़के ने उत्तर दिया, और आप कौन हैं? अकबर ने अपनी अंगूठी निकाल कर महेश दास को देते हुए कहा, तुम महाराजा अकबर – हिंदुस्तान के सम्राट से बात कर रहे हो. मुझे निडर लोग पसंद हैं. तुम मेरे दरबार में आना और मुझे ये अंगूठी दिखाना. ये अंगूठी देख कर मैं तुम्हें पहचान लूंगा. अब तुम मुझे बताओ कि मैं किस रास्ते पर चलूँ ताकि मैं आगरा पहुँच जाऊं.

महेश दास ने सिर झुका कर आगरा का रास्ता बताया और जाते हुए हिंदुस्तान के सम्राट को देखता रहा.

और इस तरह अकबर भविष्य के बीरबल से मिला.

बीरबल कहां मिलेगा ( Story Of Akbar Birbal In Hindi )

Story Of Akbar Birbal In Hindi 30: एक दिन बीरबल बाग में टहलते हुए सुबह की ताजा हवा का आनंद ले रहा था कि अचानक एक आदमी उसके पास आकर बोला, क्या तुम मुझे बता सकते हो कि बीरबल कहां मिलेगा ?

बाग में। बीरबल बोला।

वह आदमी थोड़ा सकपकाया लेकिन फिर संभलकर बोला, वह कहां रहता है ?

अपने घर में। बीरबल ने उत्तर दिया।

हैरान-परेशान आदमी ने फिर पूछा, तुम मुझे उसका पूरा पता ठिकाना क्यों नहीं बता देते ?

क्योंकि तुमने पूछा ही नहीं। बीरबल ने ऊंचे स्वर में कहा।

क्या तुम नहीं जानते कि मैं क्या पूछना चाहता हूं ? उस आदमी ने फिर सवाल किया।

नहीं। बीरबल का जवाब था।

वह आदमी कुछ देर के लिए चुप हो गया, बीरबल का टहलना जारी था। उस आदमी ने सोचा कि मुझे इससे यह पूछना चाहिए कि क्या तुम बीरबल को जानते हो ? वह फिर बीरबल के पास जा पहुंचा, बोला, बस, मुझे केवल इतना बता दो कि क्या तुम बीरबल को जानते हो ?

हां, मैं जानता हूं। जवाब मिला।

तुम्हारा क्या नाम है ? आदमी ने पूछा।

बीरबल। बीरबल ने उत्तर दिया।

अब वह आदमी भौचक्का रह गया। वह बीरबल से इतनी देर से बीरबल का पता पूछ रहा था और बीरबल था कि बताने को तैयार नहीं हुआ कि वही बीरबल है। उसके लिए यह बेहद आश्चर्य की बात थी।

तुम भी क्या आदमी हो… कहता हुआ वह कुछ नाराज सा लग रहा था, मैं तुमसे तुम्हारे ही बारे में पूछ रहा था और तुम न जाने क्या-क्या ऊटपटांग बता रहे थे। बताओ, तुमने ऐसा क्यों किया ?

मैंने तुम्हारे सवालों का सीधा-सीधा जवाब दिया था, बस !

अंततः वह आदमी भी बीरबल की बुद्धि की तीक्ष्णता देख मुस्कराए बिना न रह सका।

जल्दी बुलाकर लाओ ( Story Of Akbar Birbal In Hindi )

Story Of Akbar Birbal In Hindi 31: बादशाह अकबर एक सुबह उठते ही अपनी दाढ़ी खुजलाते हुए बोले, अरे, कोई है ? तुरन्त एक सेवक हाजिर हुआ। उसे देखते ही बादशाह बोले-जाओ, जल्दी बुलाकर लाओ, फौरन हाजिर करो। सेवक की समझ में कुछ नहीं आया कि किसे बुलाकर लाए, किसे हाजिर करें ? बादशाह से पटलकर सवाल करने की तो उसकी हिम्मत ही नहीं थी।

उस सेवक ने यह बात दूसरे सेवक को बताई। दूसरे ने तीसरे को और तीसरे ने चौथे को। इस तरह सभी सेवक इस बात को जान गए और सभी उलझन में पड़ गए कि किसे बुलाकर लाए, किसे हाजिर करें।

बीरबल सुबह घूमने निकले थे। उन्होंने बादशाह के निजी सेवकों को भाग-दौड़ करते देखा तो समझ गए कि जरूर बादशाह ने कोई अनोखा काम बता दिया होगा, जो इनकी समझ से बाहर है। उन्होंने एक सेवक को बुलाकर पूछा, क्या बात है ? यह भाग-दौड़ किसलिए हो रही है ? सेवक ने बीरबल को सारी बात बताई, महाराज हमारी रक्षा करें। हम समझ नहीं पा रहे हैं कि किसे बुलाना है।

अगर जल्दी बुलाकर नहीं ले गए, तो हम पर आफत आ जाएगी। बीरबल ने पूछा, यह बताओ कि हुक्म देते समय बादशाह क्या कर रहे थे ? बादशाह के निजी सेवक, जिसे हुक्म मिला था, उसे बीरबल के सामने हाजिर किया तो उसने बताय-जिस समय मुझे तलब किया उस समय तो बिस्तर पर बैठे अपनी दाढ़ी खुजला रहे थे। बीरबल तुरन्त सारी बात समझ गए और उनके होंठों पर मुस्कान उभर आई। फिर उन्होंने उस सेवक से कहा-तुम हाजाम को ले जाओ।

सेवक हज्जाम को बुला लाया और उसे बादशाह के सामने हाजिर कर दिया। बादशाह सोचने लगे, मैने इससे यह तो बताया ही नहीं था कि किसे बुलाकर लाना है। फिर यह हज्जाम को लेकर कैसे हाजिर हो गया ? बादशाह ने सेवक से पूछा, सच बताओ। हज्जाम को तुम अपने मन से ले आए हो या किसी ने उसे ले आने का सुझाव दिया था ?

सेवक घबरा गया, लेकिन बताए बिना भी तो छुटकारा नहीं था। बोला, बीरबल ने सुझाव दिया था, जहांपनाह ! बादशाह बीरबल की बुद्धि पर खुश हो गया।

ईश्वर अच्छा ही करता है ( Story Of Akbar Birbal In Hindi )

Story Of Akbar Birbal In Hindi 32: बीरबल एक ईमानदार तथा धर्म-प्रिय व्यक्ति था। वह प्रतिदिन ईश्वर की आराधना बिना नागा किया करता था। इससे उसे नैतिक व मानसिक बल प्राप्त होता था। वह अक्सर कहा करता था कि ईश्वर जो कुछ भी करता है मनुष्य के भले के लिए ही करता है। कभी-कभी हमें ऐसा लगता है कि ईश्वर हम पर कृपादृष्टि नहीं रखता, लेकिन ऐसा होता नहीं। कभी-कभी तो उसके वरदान को भी लोग शाप समझने की भूल कर बैठते हैं। वह हमको थोड़ी पीड़ा इसलिए देता है ताकि बड़ी पीड़ा से बच सकें।

एक दरबारी को बीरबल की ऐसी बातें पसंद न आती थीं। एक दिन वही दरबारी दरबार में बीरबल को संबोधित करता हुआ बोला, देखो, ईश्वर ने मेरे साथ क्या किया-कल-शाम को जब मैं जानवरों के लिए चारा काट रहा था तो अचानक मेरी छोटी उंगली कट गई। क्या अब भी तुम यही कहोगे कि ईश्वर ने मेरे लिए यह अच्छा किया है ?

कुछ देर चुप रहने के बाद बोला बीरबल, मेरा अब भी यही विश्वास है क्योंकि ईश्वर जो कुछ भी करता है मनुष्य के भले के लिए ही करता है।

सुनकर वह दरबारी नाराज हो गया कि मेरी तो उंगली कट गई और बीरबल को इसमें भी अच्छाई नजर आ रही है। मेरी पीड़ा तो जैसे कुछ भी नहीं। कुछ अन्य दरबारियों ने भी उसके सुर में सुर मिलाया।

तभी बीच में हस्तक्षेप करते हुए बादशाह अकबर बोले, बीरबल हम भी अल्लाह पर भरोसा रखते हैं, लेकिन यहां तुम्हारी बात से सहमत नहीं। इस दरबारी के मामले में ऐसी कोई बात नहीं दिखाई देती जिसके लिए उसकी तारीफ की जाए।

बीरबल मुस्कराता हुआ बोला, ठीक है जहांपनाह, समय ही बताएगा अब।

तीन महीने बीत चुके थे। वह दरबारी, जिसकी उंगली कट गई थी, घने जंगल में शिकार खेलने निकला हुआ था। एक हिरन का पीछा करते वह भटककर आदिवासियों के हाथों में जा पड़ा। वे आदिवासी अपने देवता को प्रसन्न करने के लिए मानव बलि में विश्वास रखते थे। अतः वे उस दरबारी को पकड़कर मंदिर में ले गए, बलि चढ़ाने के लिए। लेकिन जब पुजारी ने उसके शरीर का निरीक्षण किया तो हाथ की एक उंगली कम पाई।

नहीं, इस आदमी की बलि नहीं दी जा सकती। मंदिर का पुजारी बोला, यदि नौ उंगलियों वाले इस आदमी को बलि चढ़ा दिया गया तो हमारे देवता बजाय प्रसन्न होने के क्रोधित हो जाएंगे, अधूरी बलि उन्हें पसंद नहीं। हमें महामारियों, बाढ़ या सूखे का प्रकोप झेलना पड़ सकता है। इसलिए इसे छोड़ देना ही ठीक होगा।

और उस दरबारी को मुक्त कर दिया गया।

अगले दिन वह दरबारी दरबार में बीरबल के पास आकर रोने लगा।

तभी बादशाह भी दरबार में आ पहुंचे और उस दरबारी को बीरबल के सामने रोता देखकर हैरान रह गए।

तुम्हें क्या हुआ, रो क्यों रहे हो ? अकबर ने सवाल किया।

जवाब में उस दरबारी ने अपनी आपबीती विस्तार से कह सुनाई। वह बोला, अब मुझे विश्वास हो गया है कि ईश्वर जो कुछ भी करता है, मनुष्य के भले के लिए ही करता है। यदि मेरी उंगली न कटी होती तो निश्चित ही आदिवासी मेरी बलि चढ़ा देते। इसीलिए मैं रो रहा हूं, लेकिन ये आंसू खुशी के हैं। मैं खुश हूं क्योंकि मैं जिन्दा हूं। बीरबल के ईश्वर पर विश्वास को संदेह की दृष्टि से देखना मेरी भूल थी।

अकबर ने मंद-मंद मुस्कराते हुए दरबारियों की ओर देखा, जो सिर झुकाए चुपचाप खड़े थे। अकबर को गर्व महसूस हो रहा था कि बीरबल जैसा बुद्धिमान उसके दरबारियों में से एक है।

कौन किसका नौकर है ( Story Of Akbar Birbal In Hindi )

Story Of Akbar Birbal In Hindi 33: जब कभी दरबार में अकबर और बीरबल अकेले होते थे तो किसी न किसी बात पर बहस छिड़ जाती थी। एक दिन बादशाह अकबर बैंगन की सब्जी की खूब तारीफ कर रहे थे।

बीरबल भी बादशाह की हां में हां मिला रहे थे। इतना ही नहीं, वह अपनी तरफ से भी दो-चार वाक्य बैंगन की तारीफ में कह देते थे।

अचानक बादशाह अकबर के दिल में आया कि देखें बीरबल अपनी बात को कहां तक निभाते हैं- यह सोचकर बादशाह बीरबल के सामने बैंगन की बुराई करने लगे। बीरबल भी उनकी हां में हां मिलाने लगे कि बैंगन खाने से शारीरिक बीमारियाँ हो जाती हैं इत्यादि।

बीरबल की बात सुनकर बादशाह अकबर हैरान हो गए और बोले- बीरबल! तुम्हारी इस बात का यकीन नहीं किया जा सकता। कभी तुम बैंगन की तारीफ करते हो और कभी बुराई करते हो। जब हमने इसकी तारीफ की तो तुमने भी इसकी तारीफ की और जब हमने इसकी बुराई की तो तुमने. भी इसकी बुराई की, आखिर ऐसा क्यों?

बीरबल ने नरम लहजे में कहा- बादशाह सलामत! मैं तो आपका नौकर हूं बैंगन का नौकर नहीं।

( Story Of Akbar Birbal In Hindi ) लहरें गिनना

Story Of Akbar Birbal In Hindi 34: एक दिन अकबर बादशाह के दरबार में एक व्यक्ति नौकरी मांगने के लिए अर्जी लेकर आया। उससे कुछ देर बातचीत करने के बाद बादशाह ने उसे चुंगी अधिकारी बना दिया।

बीरबल, जो पास ही बैठा था, यह सब देख रहा था। उस आदमी के जाने के बाद वह बोला- यह आदमी जरूरत से ज्यादा चालाक जान पड़ता है। बेईमानी किये बिना नहीं रहेगा।

थोड़े ही समय के बाद अकबर बादशाह के पास उस आदमी की शिकायतें आने लगीं कि वह प्रजा को काफी परेशान करता है तथा रिश्वत लेता है। अकबर बादशाह ने उस आदमी का तबादला एक ऐसी जगह करने की सोची, जहां उसे किसी भी प्रकार की बेईमानी का मौका न मिले। उन्होंने उसे घुड़साल का मुंशी मुकर्रर कर दिया। उसका काम था घोड़ों की लीद उठवाना।

मुंशीजी ने वहां भी रिश्वत लेना आरम्भ कर दिया। मुंशीजी साईसों से कहने लगे कि तुम घोड़ों को दाना कम खिलाते हो, इसलिए मुझे लीद तौलने के लिए भेजा गया है। यदि तुम्हारी लीद तौल में कम बैठी तो अकबर बादशाह से शिकायत कर दूंगा। इस प्रकार मुंशीजी प्रत्येक घोड़े के हिसाब से एक रुपया लेने लगे।

अकबर बादशाह को जब इस बात का पता चला तो उन्होंने मुंशीजी को यमुना की लहरें गिनने का काम दे दिया। वहां कोई रिश्वत व बेईमानी का मौका ही नहीं था।

लेकिन मुंशीजी ने वहां भी अपनी अक्त के घोड़े दौड़ा दिये। उन्होंने नावों को रोकना आरम्भ कर दिया कि नाव रोको, हम लहरें गिन रहे हैं। अत: नावों को दो-तीन दिन रुकना पड़ता था। नाव वाले बेचारे तंग आ गए। उन्होंने मुंशीजी को दस रुपये देना आरम्भ कर दिया।

अकबर बादशाह को जब इस बात का पता लगा तो उन्होंने लिखकर आज्ञा दी- नावों को रोको मत, जाने दो?

उस मुंशी ने उस लिखित में थोड़ा सुधार कर टंगवा दिया – नावों को रोको, मत जाने दो – और वसूली करने लगे.

अंततः बादशाह को उस मुंशी को सार्वजनिक सेवा से बाहर करना ही पड़ा.

सही और गलत के बीच का अंतर ( Story Of Akbar Birbal )

Story Of Akbar Birbal In Hindi 35: एक बार अकबर बादशाह ने सोचा, हम रोज-रोज न्याय करते हैं। इसके लिए हमें सही और गलत का पता लगाना पड़ता है। लेकिन सही और गलत के बीच आखिर कितना अंतर होता है?

अगले दिन अकबर बादशाह ने यह प्रश्न दरबारियों से पूछा।

दरबारी इस प्रश्न का क्या उत्तर देते? दरबारियों के लिए तो बीरबल ही सभी समस्याओं की कुँजी थे, इसलिए सभी दरबारियों की नजरें बीरबल पर टिक गईं।

बादशाह समझ गए कि किसी के पास इस प्रश्न का जवाब नहीं है। यदि किसी के पास जवाब है भी तो उसमें जवाब देने की हिम्मत नहीं है, इसलिए उन्होंने बीरबल से कहा, बीरबल, तुम्हीं बताओ, सही और गलत में कितना अन्तर है?

बीरबल ने तुरन्त उत्तर दिया, बादशाह सलामत! सही और गलत के बीच में सिर्फ चार अंगुल का अंतर है।

अकबर चौंके। वह तो समझते थे कि इस प्रश्न का कोई जवाब ही नहीं हो सकता! उन्हें बीरबल का जवाब सुन कर बहुत आश्चर्य हुआ। बीरबल! अब तुम समझाओ कि तुमने सही और गलत के बीच का यह अन्तर किस प्रकार मापा?

बीरबल ने कहा,जहांपनाह! सीधी सी बात है। आँख और कान के बीच चार अँगुल का अन्तर है या नहीं?

अकबर ने कहा, हाँ, है! लेकिन मेरे प्रश्न से इसका क्या संबंध है?

बीरबल ने कहा, आपके प्रश्न से इसका संबंध है, जहांपनाह! आप जिसे अपनी आंखों से देखते हैं, वही सही है। जिसे आप अपने कानों से सुनते हैं, वह गलत भी हो सकता है। कानों से सुनी हुई बात हमेशा सच नहीं होती, इसलिए सही और गलत के बीच चार अंगुल का ही अन्तर माना जाएगा।

यह सुनकर बादशाह चकित होकर बोले, वाह! बीरबल, वाह! तुम्हारी बुद्धि और चतुराई बेजोड़ है।

बुद्धिमानो से भी बुद्धिमान ( Story Of Akbar Birbal In Hindi )

Story Of Akbar Birbal In Hindi 36: एक दिन बादशाह ने बीरबल से कहा, बीरबल कोई एक ऐसा आदमी ढूंढकर लाओं जो बुद्धिमानों से भी ज्यादा बुद्धिमान हो। जैसा हुक्म जहापनाहं! बहुत जल्दी ऐसा आदमी आपके सामने हाजिर कर दूंगा, पर इसके लिए समय और धन की जरुरत पडेगी। 500 स्वर्ण मोहरे ले लो और तुम्हे एक सप्ताह का समय दिया जाता है।

बीरबल समय और धन पाकर अपने घर पर आराम करने लगे। आधे से ज्यादा धन को उन्होंने दिन दुखीयों की सहायता में लगा दिया। सातवे दिन बीरबल ने इधर-उधर घुमकर गाय-भैस चराते हुए एक ग्वाले को पकडा उसे नहला धुलाकर अच्छे वस्त्र पहनाऐ। फिर सौ स्वर्ण मुद्राएं देकर उसे राज दरबार मं ले गये। साथ ही उसे रास्ते में अच्छी तर सिखा पढा दिया की वहां जाकर उसे क्या करना है ।

दरबार में पहुचकर ग्वाले ने निःशब्द हाथ जोडकर बादशाह को प्रणाम किया, उसके बाद बीरबल ने बादशाह से कहा आपके आदेशानुसार मैं बुद्धिमानों से भी बुद्धिमान व्यक्ति ले आया हूं । बादशाह ने ग्वाले से पूछा- तुम कहां रहते हो ? तुम्हारा नाम क्या है ? तुम कौन सा विशेष कार्य जानते हो ? बादशाह ने उससे प्रश्न पर प्रश्न किये परन्तु वह तो बीरबल द्वारा सीखा, पढ़ाकर लाया गया था। अतः उसनें कोई उत्तर नही दिया।

बादशाह सवाल करते रहे और वह व्यक्ति खामोशी से बैठा उनका चेहरा देखता रहा। बादशाह को लगा कि यह उनका अपमान है कि मैं बोलता जा रहा हूं और यह व्यक्ति खामोश है। जब उसकी ख़ामोशी उनसे और बर्दाश्त न हुई तो झल्लाकर वह बोले- यह तुम किस बेवकूफ को पकड लाये बीरबल ? यह गुंगा बहरा तो नही है? मेरे किसी प्रश्न का उत्तर इसने नहीं दिया।

तब बीरबल ने मुस्कुराकर कहा यह इसकी बुद्धिमतता हैं अन्नदाता, बुजू्रर्गो से इसने सुन रखा हैं कि राजा और अपने से अधिक बुद्धिमान व्यक्ति के सामने चुप रहने पर ही भलाई है। इसलिए यह उन सुनी हुई बातों पर अमल कर रहा है। आपको शायद याद नही कि आपने मुझसे कहा था कि कोइ ऐसा व्यक्ति ढूंढकर लाओं जो बुद्धिमानों से भी बुद्धिमान हो। यह वही आदमी हैं बादशाह अकबर बीरबल की हाजिर जवाबी सुनकर मुस्कुराये और ग्वाले को इनाम देकर विदा किया।

Story Of Akbar Birbal In Hindi >> रेत से चीनी अलग करो

Story Of Akbar Birbal In Hindi 37: बादशाह अकबर के दरबार की कार्यवाही चल रही थी, तभी एक दरबारी हाथ में शीशे का एक मर्तबान लिए वहां आया।

क्या है इस मर्तबान में ? पूछा बादशाह ने।

वह बोला, इसमें रेत और चीनी का मिश्रण है।

वह किसलिए ? फिर पूछा अकबर ने।

माफी चाहता हूँ हुजूर, दरबारी बोला, हम बीरबल की काबलियत को परखना चाहते हैं। हम चाहते हैं कि वह रेत से चीनी का दाना-दाना अलग कर दे।

बादशाह अब बीरबल से मुखातिब हुए, देख लो बीरबल, रोज ही तुम्हारे सामने एक नई समस्या रख दी जाती है। वह मुस्कराए और आगे बोले, तुम्हें बिना पानी में घोले इस रेत में से चीनी को अलग करना है।

कोई समस्या नहीं जहांपना, बोला बीरबल, यह तो मेरे बाएं हाथ का काम है। कहकर बीरबल ने वह मर्तबान उठाया और चल दिया दरबार से बाहर। बाकी दरबारी भी पीछे थे। बीरबल बाग में पहुंचकर रुका और मर्तबान से भरा सारा मिश्रण आम के एक बड़े पेड़ के चारों ओर बिखेर दिया।

यह तुम क्या कर रहे हो ? एक दरबारी ने पूछा।

बीरबल बोला, यह तुम्हें कल पता चलेगा।

अगले दिन फिर वे सभी उस आम के पेड़ के निकट जा पहुंचे। वहां अब केवल रेत पड़ी थी, चीनी के सारे दाने चीटियां बटोर कर अपने बिलों में पहुंचा चुकी थीं। कुछ चीटियां तो अभी भी चीनी के दाने घसीट कर ले जाती दिखाई दे रही थीं।

लेकिन सारी चीनी कहां चली गई ? पूछा एक दरबारी ने।

रेत से अलग हो गई। बीरबल ने उसके कान में फुसफुसाते हुए कहा। सभी जोरों से हंस पड़े।

बादशाह अकबर को जब बीरबल की चतुराई ज्ञात हुई तो बोले, अब तुम्हें चीनी ढूंढ़नी है तो चीटियों के बिल में घुसना होगा।

सभी दरबारियों ने जोरदार ठहाका लगाया और बीरबल का गुणगान करने लगे।

Story Of Akbar Birbal In Hindi >> सब बह जाएंगे

Story Of Akbar Birbal In Hindi 38: बादशाह अकबर और बीरबल शिकार पर गए हुए थे। उनके साथ कुछ सैनिक तथा सेवक भी थे। शिकार से लौटते समय एक गांव से गुजरते हुए बादशाह अकबर ने उस गांव के बारे में जानने की जिज्ञासा हुई। उन्होंने इस बारे में बीरबल से कहा तो उसने जवाब दिया—हुजूर, मैं तो इस गांव के बारे में कुछ नहीं जानता, किंतु इसी गांव के किसी बाशिन्दे से पूछकर बताता हूं।

बीरबल ने एक आदमी को बुलाकर पूछा—क्यों भई, इस गांव में सब ठीकठाक तो है न ?

उस आदमी ने बादशाह को पहचान लिया और बोला—हुजूर आपके राज में कोई कमी कैसे हो सकती है।

तुम्हारा नाम क्या है ? बादशाह ने पूछा।

गंगा।

तुम्हारे पिता का नाम ?

जमुना और मां का नाम सरस्वती है ? Story Of Akbar Birbal

हुजूर, नर्मदा।

यह सुनकर बीरबल ने चुटकी ली और बोला—हुजूर तुरन्त पीछे हट जाइए। यदि आपके पास नाव हो तभी आगे बढ़ें वरना नदियों के इस गांव में तो डूब जाने का खतरा है।

यह सुनकर बादशाह अकबर हंसे बगैर न रह सके।

Story Of Akbar Birbal In Hindi >> छोटा बांस, बड़ा बांस

Story Of Akbar Birbal In Hindi 39: एक दिन अकबर व बीरबल बाग में सैर कर रहे थे। बीरबल लतीफा सुना रहा था और अकबर उसका मजा ले रहे थे। तभी अकबर को नीचे घास पर पड़ा बांस का एक टुकड़ा दिखाई दिया। उन्हें बीरबल की परीक्षा लेने की सूझी।

बीरबल को बांस का टुकड़ा दिखाते हुए वह बोले, क्या तुम इस बांस के टुकड़े को बिना काटे छोटा कर सकते हो ?

बीरबल लतीफा सुनाता-सुनाता रुक गया और अकबर की आंखों में झांका।

अकबर कुटिलता से मुस्कराए, बीरबल समझ गया कि बादशाह सलामत उससे मजाक करने के मूड में हैं।

अब जैसा बेसिर-पैर का सवाल था तो जवाब भी कुछ वैसा ही होना चाहिए था। बीरबल ने इधर-उधर देखा, एक माली हाथ में लंबा बांस लेकर जा रहा था। उसके पास जाकर बीरबल ने वह बांस अपने दाएं हाथ में ले लिया और बादशाह का दिया छोटा बांस का टुकड़ा बाएं हाथ में।

बीरबल बोला, हुजूर, अब देखें इस टुकड़े को, हो गया न बिना काटे ही छोटा।

बड़े बांस के सामने वह टुकड़ा छोटा तो दिखना ही था।

निरुत्तर बादशाह अकबर मुस्करा उठे बीरबल की चतुराई देखकर।

Story Of Akbar Birbal In Hindi >> आधी धूप आधी छावं

Story Of Akbar Birbal In Hindi 40: एक दिन बादशाह अकबर ने खफा होकर बीरबल को नगर से बाहर जाने का आदेष दे दिया । मगर बीरबल तो हर हाल में खुष रहने वाला व्यक्ति था।

वह यह भी जानता था कि बादशाह अकबर सलामत का यह गुस्सा थोडे ही समय का है। शीघ्र ही उनकी नाराजगी दूर हो जायेगी, वे नगर से बाहर एक गांव में जा बसे।

अज्ञात वास करते-करते महीनों गुजर गये। न बादशाह अकबर ने उन्हें बुलाया और न ही वे आये। समय-समय पर बादशाह अकबर बीरबल को याद करके चिंता करते, मगर बीरबल का कोई अता-पता मालूम न होने से वे लाचार थै।

जब किसी प्रकार बीरबल का पता नही चला तो बादशाह अकबर ने उन्हे ढूंढने की तरकीब निकाली, उन्होने राज्य के चप्पे-चप्पे पर डिंडोरा पिटवा दिया कि जो शख्स आधी धूप-आधी छांया में हमारे पास आयेगा उसे एक हजार रुपये इनाम मे दिये जायेंगे।

बहुत से लोगों ने इनाम पाने की कोशिश की पर किसी को

आधी धूप आधी छायं में होकर आने की युक्ति नहीं सुझी।

यह बात फैलते-फैलते बीरबल के कानों तक भी पहूंची । वह अपने घर के पास गरीब बढई को बुलाकर बोले- तुम एक चारपाई अपने सिर पर रखकर बादशाह अकबर के पास जाओ और उनसे कहों कि मैं आधी धूप और आधी छायं में होकर आया हूं इसलिए मुझे इनाम मिलना चाहिए।

बडई बीरबल की बात मान एक चारपाई सिर पर रख बादशाह अकबर के पास पहूंचा और बोला बादशाह अकबर सलामत मैं आधी धूप और आधी छायं में चलकर आया हू। इसलिए मुझे इनाम के एक हजार रूप्ये मिलने चाहिए।

बादशाह अकबर ने उससे पुछा सच-सच बताओ , तुम्हे इस प्रकार की सलाह किसने दी। बादशाह अकबर सलामत कुछ दिनों पूर्व एक विद्वान हमारें गांव में आकर बसा है, लोग उसे बीरबल के नाम से पुकारते है। उसी के कहने पर मैंने यह कार्य किया।

बडई ने भोलेपन से कहा- बडई के मुख से बीरबल का नाम सुनकर बादशाह अकबर बडे प्रसन्न हुए। उन्होने खंजांची से बढई को एक हजार रूप्ये देने का आदेष दिया। फिर बढई के साथ अपने दो खास कर्मचारीयों को बीरबल को लाने को भेज दिया।

इस प्रकार बीरबल बादशाह अकबर के पास दोबारा पहूंच गये।

Story Of Akbar Birbal In Hindi >> खाने के बाद लेटना

Story Of Akbar Birbal In Hindi 41: किसी समय बीरबल ने अकबर को यह कहावत सुनाई थी कि खाकर लेट जा और मारकर भाग जा-यह सयानें लोगों की पहचान है। जो लोग ऐसा करते हैं, जिन्दगी में उन्हें किसी भी प्रकार का दुख नहीं उठाना पड़ता।

एक दिन अकबर के अचानक ही बीरबल की यह कहावत याद आ गई।

दोपहर का समय था। उन्होंने सोचा, बीरबल अवश्य ही खाना खाने के बाद लेटता होगा। आज हम उसकी इस बात को गलत सिद्ध कर देंगे। उन्होंने एक नौकर को अपने पास बुलाकर पूरी बात समझाई और बीरबल के पास भेज दिया।

नौकर ने अकबर का आदेश बीरबल को सुना दिया। Story Of Akbar Birbal

बीरबल बुद्धिमान तो थे ही, उन्होंने समझ लिया कि बादशाह ने उसे क्यों तुरन्त आने के लिए कहा है। इसलिए बीरबल ने भोजन करके नौकर से कहा-ठहरो, मैं कपड़े बदलकर तुम्हारे साथ ही चल रहा हूं।

उस दिन बीरबल ने पहनने के लिए चुस्त पाजामा चुना। पाजामे को पहनने के लिए वह कुछ देर के लिए बिस्तर पर लेट गए। पाजामा पहनने के बहाने वे काफी देर बिस्तर पर लेटे रहे। फिर नौकर के साथ चल दिए।

जब बीरबल दरबार में पहुंचे तो अकबर ने कहा-कहो बीरबल, खाना खाने के बाद आज भी लेटे या नहीं ? बिल्कुल लेटा था जहांपनाह। बीरबल की बात सुनकर अकबर ने क्रोधित स्वर में कहा-इसका मतलब, तुमने हमारे हुक्म की अवहेलना की है। हम तुम्हें हुक्म उदूली करने की सजा देंगे। जब हमने खाना खाकर तुरन्त बुलाया था, फिर तुम लेटे क्यों ।

बादशाह सलामत ! मैंने आपके हुक्म की अवहेलना कहां की है। मैं तो खाना खाने के बाद कपड़े पहनकर सीधा आपके पास ही आ रहा हूं। आप तो पैगाम ले जाने वाले से पूछ सकते हैं। अब ये अलग बात है कि ये चुस्त पाजामा पहनने के लिए ही मुझे लेटना पड़ा था। बीरबल ने सहज भाव से उत्तर दिया।

अकबर बादशाह बीरबल की चतुरता को समझ गए और मुस्करा पड़े।

सारा जग बेईमान है!

एक बार अकबर बादशाह ने बीरबल से शान से कहा – बीरबल! हमारी जनता बेहद ईमानदार है और हमें कितना बहुत प्यार करती है

बीरबल ने तुरन्त उत्तर दिया-बादशाह सलामत! आपके राज्य में कोई भी पूरी तरह ईमानदार नहीं है, न ही वो आपसे ज्यादा प्यार करती है।

यह तुम क्या कह रहे हो बीरबल??

मैं अपनी बात को साबित कर सकता हूं बादशाह सलामत !

ठीक है, तुम हमें साबित करके दिखाओ। बादशाह अकबर बोले।

बीरबल ने नगर में ढिंढोरा पिटवा दिया कि बादशाह सलामत एक भोज करने जा रहे हैं। उसके लिए सारी प्रजा से अनुरोध है कि कल सुबह दिन निकलने से पहले हर आदमी एक-एक लोटा दूध डाल दे। कडाहे रखवा दिये गये हैं। उनमें हर आदमी दूध डाल जाये। हर आदमी ने यही सोचा कि जहां इतना दूध इकट्ठा होगा, वहां उसके एक लोटे पानी का क्या पता चलेगा? अत: हर आदमी कड़ाहों में पानी डाल गया।

सुबह जब अकबर ने उन कड़ाही को देखा, जिनमें जनता से दूध डालने को कहा गया था, तो दंग रह गये। उन कड़ाहों में तो केवल सफेद पानी था। अकबर को वस्तुस्थिति का पता चल गया.

Story Of Akbar Birbal In Hindi >> हरे रंग का घोड़ा

Story Of Akbar Birbal In Hindi 42: एक दिन बादशाह अकबर घोड़े पर बैठकर शाही बाग में घूमने गए। साथ में बीरबल भी था। चारों ओर हरे-भरे वृक्ष और हरी-हरी घास देखकर अकबर को बहुत आनन्द आया। उन्हें लगा कि बगीचे में सैर करने के लिए तो घोड़ा भी हरे रंग का ही होना चाहिए।

उन्होंने बीरबल से कहा, बीरबल मुझे हरे रंग का घोड़ा चाहिए। तुम मुझे सात दिन में हरे रंग का घोड़ा ला दो। यदि तुम हरे रंग का घोड़ा न ला सके तो हमें अपनी शक्ल मत दिखाना। हरे रंग का घोड़ा तो होता ही नहीं है। अकबर और बीरबल दोनों को यह मालूम था। लेकिन अकबर को तो बीरबल की परीक्षा लेनी थी।

दरअसल, इस प्रकार के अटपटे सवाल करके वे चाहते थे कि बीरबल अपनी हार स्वीकार कर लें और कहें कि जहांपनाह मैं हार गया, मगर बीरबल भी अपने जैसे एक ही थे। बीरबल के हर सवाल का सटीक उत्तर देते थे कि बादशाह अकबर को मुंह की खानी पड़ती थी।

बीरबल हरे रंग के छोड़ की खोज के बहाने सात दिन तक इधर-उधर घूमते रहे। आठवें दिन वे दरबार में हाजिर हुए और बादशाह से बोले, जहांपनाह ! मुझे हरे रंग का घोड़ा मिल गया है। बादशाह को आश्चर्य हुआ। उन्होंने कहा, जल्दी बताओ, कहां है हरा घोड़ा ? बीरबर ने कहा, जहांपनाह ! घोड़ा तो आपको मिल जाएगा, मैंने बड़ी मुश्किल से उसे खोजा है, मगर उसके मालिक ने दो शर्त रखी हैं।

बादशाह ने कहा, क्या शर्ते हैं ?

पहली शर्त तो यह है कि घोड़ा लेने कि लिए आपको स्वयं जाना होगा।

यह तो बड़ी आसान शर्त है। दूसरी शर्त क्या है ?

घोड़ा खास रंग का है, इसलिए उसे लाने का दिन भी खास ही होगा। उसका मालिक कहता है कि सप्ताह के सात दिनों के अलावा किसी भी दिन आकर उसे ले जाओ।

अकबर बीरबल का मुंह देखते रह गए।

बीरबल ने हंसते हुए कहा, जहांपनाह ! हरे रंग का घोड़ा लाना हो, तो उसकी शर्तें भी माननी ही पड़ेगी।

अकबर खिलखिला कर हंस पड़े। बीरबल की चतुराई से वह खुश हुए। समझ गए कि बीरबल को मूर्ख बनाना सरल नहीं है। Story Of Akbar Birbal

Story Of Akbar Birbal In Hindi >> पैसे की थैली किसकी

Story Of Akbar Birbal In Hindi 42: दरबार लगा हुआ था। बादशाह अकबर राज-काज देख रहे थे। तभी दरबान ने सूचना दी कि दो व्यक्ति अपने झगड़े का निपटारा करवाने के लिए आना चाहते हैं।

बादशाह ने दोनों को बुलवा लिया। दोनों दरबार में आ गए और बादशाह के सामने झुककर खड़े हो गए।

कहो क्या समस्या है तुम्हारी? बादशाह ने पूछा।

हुजूर मेरा नाम काशी है, मैं तेली हूं और तेल बेचने का धंधा करता हूं और हुजूर यह कसाई है।

इसने मेरी दुकान पर आकर तेल खरीदा और साथ में मेरी पैसों की भरी थैली भी ले गया। जब मैंने इसे पकड़ा और अपनी थैली मांगी तो यह उसे अपनी बताने लगा, हुजूर अब आप ही न्याय करें।

जरूर न्याय होगा, अब तुम कहो तुम्हें क्या कहना है? बादशाह ने कसाई से कहा। हुजूर मेरा नाम रमजान है और मैं कसाई हूं, हुजूर, जब मैंने अपनी दुकान पर आज मांस की बिक्री के पैसे गिनकर थैली जैसे ही उठाई, यह तेली आ गया और मुझसे यह थैली छीन ली। अब उस पर अपना हक जमा रहा है, हुजूर, मुझ गरीब के पैसे वापस दिला दीजिए।

दोनों की बातें सुनकर बादशाह सोच में पड़ गए। उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि वह किसके हाथ फैसला दें। उन्होंने बीरबल से फैसला करने को कहा।

बीरबल ने उससे पैसों की थैली ले ली और दोनों को कुछ देर के लिए बाहर भेज दिया। बीरबल ने सेवक से एक कटोरे में पानी मंगवाया और उस थैली में से कुछ सिक्के निकालकर पानी में डाले और पानी को गौर से देखा। फिर बादशाह से कहा- हुजूर, इस पानी में सिक्के डालने से तेल जरा-सा भी अंश पानी में नहीं उभार रहा है। यदि यह सिक्के तेली के होते तो यकीनन उन पर सिक्कों पर तेल लगा होता और वह तेल पानी में भी दिखाई देता।

बादशाह ने भी पानी में सिक्के डाले, पानी को गौर से देखा और फिर बीरबल की बात से सहमत हो गए।

बीरबल ने उन दोनों को दरबार में बुलाया और कहा- मुझे पता चल गया है कि यह थैली किसकी है। काशी, तुम झूठ बोल रहे हो, यह थैली रमजान कसाई की है।

हुजूर यह थैली मेरी है।काशी एक बार फिर बोला।

बीरबल ने सिक्के डले पानी वाला कटोरा उसे दिखाते हुए कहा- यदि यह थैली तुम्हारी है तो इन सिक्कों पर कुछ-न-कुछ तेल अवश्य होना चाहिए, पर तुम भी देख लो… तेल तो अंश मात्र भी नजर नहीं आ रहा है।

काशी चुप हो गया।

बीरबल ने रमजान कसाई को उसकी थैली दे दी और काशी को कारागार में डलवा दिया।

Story Of Akbar Birbal In Hindi >> कवि और धनवान आदमी

Story Of Akbar Birbal In Hindi 43: एक दिन एक कवि किसी धनी आदमी से मिलने गया और उसे कई सुंदर कविताएं इस उम्मीद के साथ सुनाईं कि शायद वह धनवान खुश होकर कुछ ईनाम जरूर देगा। लेकिन वह धनवान भी महाकंजूस था, बोला, तुम्हारी कविताएं सुनकर दिल खुश हो गया। तुम कल फिर आना, मैं तुम्हें खुश कर दूंगा।

कल शायद अच्छा ईनाम मिलेगा। ऐसी कल्पना करता हुआ वह कवि घर पहुंचा और सो गया। अगले दिन वह फिर उस धनवान की हवेली में जा पहुंचा। धनवान बोला, सुनो कवि महाशय, जैसे तुमने मुझे अपनी कविताएं सुनाकर खुश किया था, उसी तरह मैं भी तुमको बुलाकर खुश हूं। तुमने मुझे कल कुछ भी नहीं दिया, इसलिए मैं भी कुछ नहीं दे रहा, हिसाब बराबर हो गया।

कवि बेहद निराश हो गया। उसने अपनी आप बीती एक मित्र को कह सुनाई और उस मित्र ने बीरबल को बता दिया। सुनकर बीरबल बोला, अब जैसा मैं कहता हूं, वैसा करो। तुम उस धनवान से मित्रता करके उसे खाने पर अपने घर बुलाओ। हां, अपने कवि मित्र को भी बुलाना मत भूलना। मैं तो खैर वहां मैंजूद रहूंगा ही।

कुछ दिनों बाद बीरबल की योजनानुसार कवि के मित्र के घर दोपहर को भोज का कार्यक्रम तय हो गया। नियत समय पर वह धनवान भी आ पहुंचा। उस समय बीरबल, कवि और कुछ अन्य मित्र बातचीत में मशगूल थे। समय गुजरता जा रहा था लेकिन खाने-पीने का कहीं कोई नामोनिशान न था। वे लोग पहले की तरह बातचीत में व्यस्त थे। धनवान की बेचैनी बढ़ती जा रही थी, जब उससे रहा न गया तो बोल ही पड़ा, भोजन का समय तो कब का हो चुका ? क्या हम यहां खाने पर नहीं आए हैं ?

खाना, कैसा खाना ? बीरबल ने पूछा।

धनवान को अब गुस्सा आ गया, क्या मतलब है तुम्हारा ? क्या तुमने मुझे यहां खाने पर नहीं बुलाया है ?

खाने का कोई निमंत्रण नहीं था। यह तो आपको खुश करने के लिए खाने पर आने को कहा गया था। जवाब बीरबल ने दिया। धनवान का पारा सातवें आसमान पर चढ़ गया, क्रोधित स्वर में बोला, यह सब क्या है? इस तरह किसी इज्जतदार आदमी को बेइज्जत करना ठीक है क्या ? तुमने मुझसे धोखा किया है।

अब बीरबल हंसता हुआ बोला, यदि मैं कहूं कि इसमें कुछ भी गलत नहीं तो…। तुमने इस कवि से यही कहकर धोखा किया था ना कि कल आना, सो मैंने भी कुछ ऐसा ही किया। तुम जैसे लोगों के साथ ऐसा ही व्यवहार होना चाहिए।

धनवान को अब अपनी गलती का आभास हुआ और उसने कवि को अच्छा ईनाम देकर वहां से विदा ली।

वहां मौजूद सभी बीरबल को प्रशंसाभरी नजरों से देखने लगे। Story Of Akbar Birbal

Story Of Akbar Birbal In Hindi >> तोता ना खाता है ना पीता है

Story Of Akbar Birbal In Hindi 44: एक बहेलीये को तोते में बडी ही दिलचस्पी थी. वह उन्हें पकडता, सिखाता और तोते के शौकीन लोगों को ऊँचे दामों में बेच देता था. एक बार एक बहुत ही सुन्दर तोता उसके हाथ लगा. उसने उस तोते को अच्छी-अच्छी बातें सिखायीं उसे तरह-तरह से बोलना सिखाया और उसे लेकर अकबर के दरबार में पहुँच गया. दरबार में बहेलिये ने तोते से पूछा – बताओ ये किसका दरबार है? तोता बोला, यह जहाँपनाह अकबर का दरबार है.

सुनकर अकबर बडे ही खुश हुए. वह बहेलिये से बोले, हमें यह तोता चाहिये, बोलो इसकी क्या कीमत माँगते हो. बहेलीया बोला जहाँपनाह – सब कुछ आपका है आप जो दें वही मुझे मंजूर है. अकबर को जवाब पसंद आया और उन्होंने बहेलिये को अच्छी कीमत देकर उससे तोते को खरीद लिया.

महाराजा अकबर ने तोते के रहने के लिये बहुत खास इंतजाम किये. उन्होंने उस तोते को बहुत ही खास सुरक्षा के बीच रखा. और रखवालों को हिदायत दी कि इस तोते को कुछ नहीं होना चाहिये. यदि किसी ने भी मुझे इसकी मौत की खबर दी तो उसे फाँसी पर लटका दिया जायेगा. अब उस तोते का बडा ही ख्याल रखा जाने लगा. मगर विडंबना देखीये कि वह तोता कुछ ही दिनों बाद मर गया. अब उसकी सूचना महाराज को कौन दे?

रखवाले बडे परेशान थे. तभी उन्में से एक बोला कि बीरबल हमारी मदद कर सकता है. और यह कहकर उसने बीरबल को सारा वृतांत सुनाया तथा उससे मदद माँगी.

बीरबल ने एक क्षण कुछ सोचा और फिर रखवाले से बोला – ठीक है तुम घर जाओ महाराज को सूचना मैं दूँगा. बीरबल अगले दिन दरबार में पहुँचे और अकबर से कहा, हुज़ूर आपका तोता… अकबर ने पूछा – हाँ-हाँ क्या हुआ मेरे तोते को? बीरबल ने फिर डरते-डरते कहा – आपका तोता जहाँपनाह… हाँ-हाँ बोलो बीरबल क्या हुआ तोते को? महाराज आपका तोता…. बीरबल बोला. अरे खुदा के लिये कुछ तो कहो बीरबल मेरे तोते को क्या हुआ, अकबर ने खीजते हुए कहा.

जहाँपनाह, आपका तोता ना तो कुछ खाता है ना कुछ पीता है, ना कुछ बोलता है ना अपने पँख फडफडाता है, ना आँखे खोलता है और ना ही… राज ने गुस्से में कहा – अरे सीधा-सीधा क्यों नहीं बोलते की वो मर गया है. बीरबल तपाक से बोला – हुज़ूर मैंने मौत की खबर नहीं दी ब्लकि ऐसा आपने कहा है, मेरी जान बख्शी जाये.

और महाराज निरूत्तर हो गये.

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READ: Akbar Birbal ki Kahaniyan | 27 अकबर बीरबल की कहानियाँ

Conclusion:

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